आचार्यश्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज संघ का आगमन 24 जुलाई को कुंभोज में सुबह 8 बजे होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों में दिगंबर जैन आचार्य, मुनि और आर्यिकाएं एक स्थान पर विराजमान रहकर प्रवचन, स्वाध्याय, तप, त्याग और धर्म प्रभावना के माध्यम से समाज को संयम और संस्कारों का संदेश देंगे। कुंभोज से पढ़िए यह खबर…
कुंभोज (महाराष्ट्र)। जैन संतों के चरण-रज से पावन इस कुंभोज की भूमि पर अनेक आचार्यों, मुनियों, आर्यिकाओं ने विचरण कर इसे अध्यात्म, अहिंसा और त्याग से अलंकृत किया है। शिक्षण महर्षी पद्मभूषण डॉ. कर्मवीर भाऊराव पाटील की जन्मभूमि भी कुंभोज है। जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व चातुर्मास के लिए आचार्यश्री चंद्रप्रभसागरजी महाराज, मुनि श्री नमितसागरजी, मुनिश्री भास्वतसागरजी महाराज, मुनिश्री सरल सागर जी, मुनिश्री चंद्रकीर्ति सागर जी, ऐलक श्री वात्सल्यसागर जी का आगमन 24 जुलाई को कुंभोज में सुबह 8 बजे होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों में दिगंबर जैन आचार्य, मुनि और आर्यिकाएं एक स्थान पर विराजमान रहकर प्रवचन, स्वाध्याय, तप, त्याग और धर्म प्रभावना के माध्यम से समाज को संयम और संस्कारों का संदेश देंगे।

इन विशेष अवसरों पर होंगे धार्मिक आयोजन
वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा की भावना के कारण जैन संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजते हैं। चातुर्मास के दौरान गुरु पूर्णिमा, वीर शासन जयंती, दशलक्षण महापर्व, अनंत चतुर्दशी, क्षमावाणी पर्व और भगवान महावीर मोक्ष कल्याणक सहित अनेक धार्मिक आयोजन होंगे।
इन मंदिरों के पदाधिकारी कर रहे हैं तैयारी
श्री भगवान आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कुंभोज, श्री भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर एवं सकल दिगंबर जैन समाज कुंभोज की ओर से विद्यासन्मति दास पावन वर्षायोग 2026 का आयोजन बडे उत्साह के साथ किया जा रहा है।













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