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गुरु महिमा का अनूठा दृश्य: गुजरात की दाहोद नगरी गवाह बनेगी दो महान जैन आचार्यों के महामिलन की


कोडरमा। जैन समाज और अध्यात्म जगत के लिए 17 जून का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम सवेरा लेकर आ रहा है। गुजरात की पावन दाहोद नगरी में तप और संयम के दो महान संतों का अभूतपूर्व मिलन होने जा रहा है।दाहोद / कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार अजमेरा की यह खबर…


दाहोद / कोडरमा। जैन समाज और अध्यात्म जगत के लिए 17 जून का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम सवेरा लेकर आ रहा है। गुजरात की पावन दाहोद नगरी में तप और संयम के दो महान संतों का अभूतपूर्व मिलन होने जा रहा है। इसे “तप के दो शिखरों का महामिलन” और “संयम के दो सूर्यों का संगम” कहा जा रहा है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

परतापुर से पुष्पगिरी विहार के बीच का ऐतिहासिक पड़ाव

सिंह निष्क्रीड़ित व्रत जैसी कठिन साधना करने वाले आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का मंगल विहार इस समय राजस्थान के परतापुर से पुष्पगिरी की ओर हो रहा है। इसी विहार के दौरान, 17 जून को दाहोद नगरी में उनका आगमन होगा।

दो तपस्वियों का अनूठा मिलन

दाहोद की धरती पर आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का मिलाप, आचार्य श्री सन्मति सागर जी के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री सुनील सागर जी से होगा। जब यह दो महान अध्यात्मिक विभूतियाँ एक साथ मंच पर उपस्थित होंगी, तो वह दृश्य गुरु महिमा का एक अनूठा और अलौकिक उदाहरण पेश करेगा।

भक्तों में उत्साह का माहौल

इस महामिलन के साक्षी बनने के लिए स्थानीय जैन समाज सहित देश के विभिन्न कोनों से भक्तों का दाहोद पहुँचना शुरू हो चुका है। धर्मसभा और अगवानी को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे महान संतों का एक साथ मिलना साक्षात ऊर्जा के महापुंज के मिलन जैसा है।

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