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राजधानी में पुनः चरण रखकर भावलिंगी संत ने किया दिल्ली को पुनः पावन : 17 माह की प्यास हुई पूरी, जब कृष्णानगर के श्रीराम पुनः भक्तों को दर्शन देने पधारे


श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी की कृष्णानगर से मंगल विहार-विदाई विगत वर्ष जनवरी माह में हुई थी। भक्तों ने भक्ति डोर को कमजोर नहीं होने दी अपितु हर दिन गुरु चरणों में उपस्थित होकर गुरुभक्ति को और अधिक मजबूती प्रदान की। दिल्ली से पढ़िए, सोनम जैन की यह रिपोर्ट…


दिल्ली। श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी की कृष्णानगर से मंगल विहार-विदाई विगत वर्ष जनवरी माह में हुई थी। भक्तों ने भक्ति डोर को कमजोर नहीं होने दी अपितु हर दिन गुरु चरणों में उपस्थित होकर गुरुभक्ति को और अधिक मजबूती प्रदान की। फलस्वरूप पुनः गुरु चरणों में बारम्बार निवेदन चलता रहा और भक्तों के भगवान आचार्य भगवन को चतुर्विध संघ के साथ कृष्णानगर आना ही पड़ा। सोमवार का पावन दिवस तब अविस्मरणीय हो गया, जब गुरु और भक्तों के मिलन के साथ संत – संतों का भी वात्सल्य मिलन हुआ।

संतों का हुआ वात्सल्य मिलन

आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ का मंगल आगमन कैलाश नगर से कृष्णानगर की ओर हो रहा था तब ही पट्‌टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री अनुपमसागर जी ससंघ एवं आचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज के शिष्य मुनि श्री विशम सागर जी मुनिराज ससंघ ने आचार्य गुरुवर ससंघ (33 पिच्छी) की भव्य मंगल भागवानी की। स्वागत किया, पादप्रक्षालन किया और साथ ही विनयांजलि के माध्यम से श्रद्धा सुमन गुरु चरणों में समर्पित किए। 2024 की भगवती जिनदीक्षा की यादें पुनः आज ताजा हो गईं।

दीक्षा स्थली कृष्णानगर में पदार्पण

राजधानी में दीक्षा ग्रहण करने वाले आचार्य गुरुवर के 13 शिष्यों ने दीक्षोपरांत प्रथम बार अपनी दीक्षा स्थली कृष्णानगर में पदार्पण जो किया था। चातुर्मास 2024 में वैराग्य को प्राप्त होने वाली 3 बाल ब्रह्मचारिणी बहनें भी अपनी अन्म स्थली पर आचार्य संघ के साथ ही कृष्णा नगर पधारी।

 सरस्वती मंत्र बीज संस्कार होगा

19 जून को पुनः रचेगा इतिहास। जी हाँ, राजधानी के “विवान वेंकट हॉल” में 8 वर्ष से 25 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं के मस्तक पर होंगे आचार्य भगवन् के कर कमल एवं मुखारविन्द से श्री सरस्वती मंत्र बीज संस्कार। जो युवा-युवतियों की बुद्धि-ज्ञान, संस्कारों को पुनर्जीवित करके उन्हें एक सहश्रावक-श्राविका होने में नींव का पत्थर साबित होंगी। संस्कार के माध्यम से एक सुव्यवस्थित समाज, मजबूत राष्ट्र का निर्माण होगा तो वहीं श्राविका-श्रवक आत्म हित के मार्ग पर भी अग्रसर हो सकेंगे। 19 जून को “श्रुत पंचमी ” के पावन पर्व पर “माँ जिनवाणी” की आराधना के साथ ही हम सबको ज्ञात होगा कि सन् 2026 का भावलिंगी संत का चातुर्मास कहाँ होगा?

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