बड़वानी में आचार्य श्री आदि सागर जी की मूल परंपरा के आचार्य महावीर कीर्ति जी,आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिकाश्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी संघस्थ आर्यिका अनघ मति जी माताजी और क्षुल्लिका संभाव मति जी माताजी का मंगलवार प्रातः राजघाट रोड से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट…
धामनोद। बड़वानी में आचार्य श्री आदि सागर जी की मूल परंपरा के आचार्य महावीर कीर्ति जी,आचार्य श्री सन्मति सागर जी के शिष्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिकाश्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी संघस्थ आर्यिका अनघ मति जी माताजी और क्षुल्लिका संभाव मति जी माताजी का मंगलवार प्रातः राजघाट रोड से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका माताजी का मंगल चातुर्मास खेरवाड़ा राजस्थान में हुआ था। जहां से पद विहार करते हुए गुजरात के बड़ौदा, पावागढ़ से बड़वानी पधारी हैं। सोमवार को रात्रि विश्राम धार जिले के कड़माल ग्राम में हुआ था। प्रातः बड़े धूमधाम और भक्ति भाव से महिला, पुरुष और युवा माताजी के साथ पद विहार में शामिल हुए और माताजी के पाद प्रक्षालन किया। श्रीफल भेंट कर नगर में मंगल प्रवेश कराया।
जिनके घर खुले थे। उनको रत्न मिल गए
दिगंबर जैन मंदिर पहुंच कर माताजी ने सभी वेदियों में विराजित भगवान के दर्शन किए और माताजी के मुखारविन्द से शांतिधारा हुई। माताजी ने धर्मसभा में कहा कि एक बार एक गांव में मुनादी करवाई कि सभी जन अपने अपने घरों को रात में खुला रखें। रात को राजा आएंगे और रत्न लुटाएंगे। सभी ने एक-दो दिन घर के दरवाजे खुले रखे पर कोई नहीं आया और ना ही रत्न लुटाए तो कुछ लोगों ने दरवाजे बंद कर दिए और सो गए किन्तु कुछ लोगों ने दरवाजे खुले रखे और जागते रहे और एक दिन राजा आए रत्न लुटाकर चले गए, जो जाग रहे थे और जिनके घर खुले थे। उनको रत्न मिल गए और जिन्होंने दरवाजे बंद कर लिए थे और सो गए थे। वे रत्न पाने से वंचित रह गए। उन्हें पछतावा हुआ। उसी प्रकार जिसे गुरु का सानिध्य चाहिए, वो सब जल्दी आ जाते हैं और आ गए और जिनको सानिध्य और दर्शन नहीं मिला वो घर पर ही रह गए।
19 जून को आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाएगा
आर्यिका माता जी ने कहा कि संपूर्ण निमाड़ वालों का सौभाग्य है कि इस सिद्ध भूमि बावनगजा के पास निवास करते हो और इस सिद्ध भूमि, जहां से करोड़ो मुनियों ने मोक्ष को प्राप्त किया है। जिसका कण-कण पावन है और इस सिद्ध भूमि पर कई साधु-संतों के पावन चरण पड़ते हैं और आवागमन होता रहता है। निमाड़ वासियों को सप्ताह में एक बार और बड़वानी वासियों को दिन में एक बार सिद्ध भूमि पर दर्शन करने जाना ही चाहिए। आगामी 19 जून को आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाएगा।













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