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रवीन्द्र भवन सागर में प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का भव्य सामूहिक समापन, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान: प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता के विजेताओं को मिले आकर्षक पुरस्कार, प्राकृत भाषा संरक्षण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ समारोह


 सागर के रवीन्द्र भवन में प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का भव्य सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ। उत्कृष्ट विद्यार्थियों, संयोजकों और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया तथा प्रतियोगिता विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सागर से पढ़िए,रत्नेश जैन एवं राजेश जैन रागी की खबर


सागर। सागर के रवीन्द्र भवन में प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का भव्य सामूहिक समापन एवं सम्मान समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक, समाजजन एवं प्राकृत भाषा के प्रेमी शामिल हुए। पूरे सभागार में प्राकृत भाषा और जैन संस्कृति के प्रति उत्साह का वातावरण देखने को मिला।

अनेक क्षेत्रों में लगाए गए थे शिक्षण शिविर

फाउंडेशन द्वारा सागर नगर सहित गौराबाई कटरा, रामपुरा वार्ड, बालक कॉम्प्लेक्स, वर्धमान कॉलोनी, नेहानगर, तिलकगंज, शाहगढ़ और गढ़ाकोटा सहित कई क्षेत्रों में प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर आयोजित किए गए थे। इन शिविरों में विद्यार्थियों को प्राकृत भाषा, जैन संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन कराया गया।

अतिथियों ने की फाउंडेशन की सराहना

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संतोष जैन ‘घड़ी’ एवं जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में प्राकृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की महत्वपूर्ण पहल बताया।

शिविरों की उपलब्धियों का प्रस्तुत किया प्रतिवेदन

क्षेत्रीय संयोजक अनिल जैन शास्त्री एवं विजय जैन शास्त्री (शाहगढ़) ने विभिन्न शिविरों की गतिविधियों और उपलब्धियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। वहीं फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने प्राकृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक लोगों को इसके अध्ययन से जुड़ने का आह्वान किया।

विद्वानों का मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम को सफल बनाने में राजकुमार जैन शास्त्री, डॉ. हरिश्चंद्र जैन शास्त्री, नन्हेभाई शास्त्री एवं पवन दीवान का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनके प्रेरक विचारों ने उपस्थित जनसमूह को प्राकृत भाषा के प्रति और अधिक जागरूक किया।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

समारोह में विभिन्न शिविरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही सभी शिविरों के स्थानीय संयोजकों, अध्यक्षों, मंत्रियों एवं सहयोगी कार्यकर्ताओं का भी सम्मान किया गया।

लकी ड्रा रहा आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में प्राकृत प्रज्ञा प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के लिए आयोजित लकी ड्रा रहा। विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए, जिससे प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

प्रभावी संचालन और आभार प्रदर्शन

समारोह का संचालन डॉ. राजेश जैन शास्त्री (ललितपुर) ने अपनी प्रभावी एवं सरस शैली में किया। अंत में अरुण जैन शास्त्री (जबलपुर) ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का संदेश

यह समारोह केवल एक समापन कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक प्रेरणादायी अभियान बनकर उभरा। कार्यक्रम ने समाज में भाषा, संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का सशक्त संदेश दिया।

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