एरोड्रम थाना क्षेत्र के ग्रेटर बाबा परिसर स्थित श्री दिगंबर जैन नवग्रह जिनालय में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। इंदौर ब्यूरो की पढ़िए यह खबर…
इंदौर। एरोड्रम थाना क्षेत्र के ग्रेटर बाबा परिसर स्थित श्री दिगंबर जैन नवग्रह जिनालय में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के पास से चोरी की गई चांदी की मूर्तियां, अष्टधातु की मूर्ति, चांदी के कलश और वारदात में इस्तेमाल की गई। मोटरसाइकिल बरामद की है। जब्त किए गए कुल माल की कीमत करीब चार लाख रुपए बताई जा रही है।एसीपी विवेक सिंह के अनुसार,पकड़े गए आरोपियों की पहचान ललित सिंह चौहान निवासी खाटूपूरा, थाना बड़वाह, विशाल केवट निवासी आमपूरा तहसील महेश्वर, ओमप्रकाश चौहान निवासी जगतपुरा बड़वाह, गीताबाई मकवाना:निवासी ग्राम मोरद, मरीमाता टेकरा, तेजाजी नगर के रूप में पहचान हुई है। पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ कर रही है।
200 सीसीटीवी कैमरे खंगाले तब मिला सुराग
ग्रेटर बाबा परिसर निवासी फरियादी अनुराग वैद्य ने एरोड्रम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 3 मई की रात 2 से 3 बजे के बीच बदमाशों ने मंदिर का ताला तोड़ा था। वे मंदिर से चांदी की मूर्तियां, चांदी के बर्तन और पांडुशिला चोरी कर फरार हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी (टीआई) देवेंद्रसिंह कुशवाह ने तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस टीम ने इलाके के करीब 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, जिसके आधार पर आरोपियों का सुराग मिला।
महिला का बेटा करता था चोरी, मां लगाती थी माल ठिकाने
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी महिला गीताबाई मकवाना का बेटा लखन चोरी की वारदातों को अंजाम देता था, जो फिलहाल फरार है। गीताबाई चोरी के माल को छिपाने और उसे ठिकाने लगाने का काम करती थी। फरार आरोपी लखन समेत 5-6 अन्य संदिग्धों की तलाश में पुलिस की टीमें महाराष्ट्र में लगातार दबिश दे रही हैं।
मंदिर को माना था सॉफ्ट टारगेट
पकड़े गए तीनों पुरुष आरोपी बड़वाह के रहने वाले हैं। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने इंदौर के स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इस मंदिर की रेकी की थी। उन्हें लगा था कि मंदिर की दानपेटियों में लाखों रुपए का दान जमा रहता है, इसलिए उन्होंने इसे आसान निशाना (सॉफ्ट टारगेट) बनाया। मामले को सुलझाने और गिरोह को पकड़ने के लिए एरोड्रम और तेजाजी नगर थाने के स्टाफ को मिलाकर 10 विशेष टीमें बनाई गई थीं। ये टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर काम करते हुए बदमाशों की खोजबीन में जुटी हुई थीं।













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