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संयम ने संसार त्यागकर धारण किया साधु जीवन : बने युगादिचंद्र सागर महाराज हजारों श्रद्धालुओं ने दी भावभीनी अनुमोदना


शहर में हुए भव्य दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को दीक्षार्थी संयम मेहता ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साधु दीक्षा ग्रहण की और युगादिचंद्र सागर महाराज के रूप में नवजीवन प्रारंभ किया। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के साक्षी बनने हेतु राजस्थान एवं मध्यप्रदेश सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। शहर में हुए भव्य दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को दीक्षार्थी संयम मेहता ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साधु दीक्षा ग्रहण की और युगादिचंद्र सागर महाराज के रूप में नवजीवन प्रारंभ किया। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के साक्षी बनने हेतु राजस्थान एवं मध्यप्रदेश सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। खैराबाद रोड स्थित कंचन सिटी में निर्मित अगमोद्वारक नगरी में आयोजित इस भव्य समारोह में आचार्यश्री आनंदचंद्र सागर सूरी जी के सानिध्य में धर्मसभा हुई। दीक्षार्थी संयम मेहता के रजोहरण ग्रहण करते ही पूरा पंडाल जिन शासन के जयकारों से गूंज उठा। दीक्षा से पूर्व प्रातः 7.30 बजे संयम मेहता के निवास से भव्य शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों के साथ प्रारंभ हुई, जो दीक्षा स्थल पहुंची। यहां उनका विजय तिलक किया गया। दीक्षार्थी ने सांसारिक आभूषणों एवं वस्तुओं का त्यागकर परिवारजनों को सौंप दिया। श्रीजी पूजन के बाद आचार्य श्री द्वारा रजोहरण प्रदान किया गया। इसके बाद वेश परिवर्तन बाद जब संयम मेहता साधु वेश में सभा मंडप में पहुंचे तो श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। पूरे वातावरण में हर्ष और भावुकता का अद्भुत संगम देखने को मिला, अनेक श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। आचार्य आनंदचंद्र सागर महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिक संपदा से व्यक्ति ऊंचाई प्राप्त कर सकता है, लेकिन आध्यात्मिक संपदा के समक्ष हर व्यक्ति नतमस्तक होता है। उन्होंने कहा कि पानी से नहाने वाले लिबास बदलते हैं, पसीने से नहाने वाले इतिहास बदलते हैं। उन्होंने मेहता परिवार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जिन शासन की सेवा में अपना कुलदीपक समर्पित कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

लाभार्थी परिवारों की सहभागिता

दीक्षा महोत्सव में विभिन्न धार्मिक उपकरणों के अर्पण का लाभ अनेक परिवारों द्वारा लिया गया। नामकरण का लाभ दिनेश कुमार फाफरिया परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा कांबली, दांडी, दंडासन, आसन, संथारा, उत्तर पट्टा, गोचरी पात्र, तरपणी, स्वाध्याय पोथी एवं पूजनी आदि के लाभ विभिन्न परिवारों द्वारा ग्रहण किए गए।

जनप्रतिनिधियों ने की सराहना

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जैन समाज का युवा जब संसार त्यागकर धर्म मार्ग अपनाता है, तो यह समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक होता है। उन्होंने मेहता परिवार को साधुवाद दिया। पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि यह आध्यात्मिकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कोटा, बूंदी, झालावाड़, इंदौर सहित अनेक शहरों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।

भावुक विदाई कार्यक्रम

दीक्षा की पूर्व संध्या पर आयोजित “संसार विदाई कार्यक्रम” अत्यंत भावुक रहा। दीक्षार्थी संयम मेहता ने अपने उद्बोधन में दीक्षा का श्रेय साध्वी युगादिप्रिया श्रीजी को देते हुए कहा कि वे ममता के बंधनों को त्यागकर वैराग्य पथ पर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने सभी जीवों से क्षमा याचना की। परिवारजनों से आज्ञा लेने के दौरान पूरे पंडाल में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा और सभी की आंखें नम हो गईं।

दान एवं संकल्प की प्रेरणा

प्रवक्ता वीरेंद्र जैन के अनुसार, पूज्य आचार्य की प्रेरणा से नवदीक्षित महाराज ने तीन माह का मौन व्रत धारण किया, वहीं माता-पिता ने आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लिया।

कंचन सिटी के चेयरपर्सन तेजमल सर्राफ ने जैन समाज की सुविधा हेतु 2000 वर्गफीट भूमि दान की।

अभूतपूर्व उत्साह, पंडाल पड़ा छोटा

दीक्षा महोत्सव में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। लगभग 5 घंटे तक श्रद्धालु अपलक कार्यक्रम देखते रहे। प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले कार्यक्रम में किसी ने भी बीच में उठना उचित नहीं समझा। पंडाल छोटा पड़ गया और बाहर भी बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। दीक्षा महोत्सव समिति के संरक्षक हुकुम बाफना ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

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