आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 35 पिच्छी वशिष्ठ मार्ग श्री आदिनाथ जिनालय श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। 15 अप्रैल को संघ सहित विवेक विहार कॉलोनी में जिनालय के दर्शन किए। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 35 पिच्छी वशिष्ठ मार्ग श्री आदिनाथ जिनालय श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। 15 अप्रैल को संघ सहित विवेक विहार कॉलोनी में जिनालय के दर्शन किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि जिस प्रकार रोगी का इलाज हॉस्पिटल में होता है। उसी प्रकार कर्मों से पीड़ित प्राणी का इलाज जिनालय से होता है। मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है, इसे सार्थक बनाना हमारा कर्तव्य है। सच्चा धर्म बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि कुल परंपरा और संस्कारों के अनुसार जीवन जीना है।पूजा तभी फलदायी होती है, जब वह सही विधि और शुद्ध भाव से की जाए। त्याग, तप और संयम अपनाकर ही मनुष्य पूज्य बन सकता है। सुरेश सबलावत के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि हमारे परिणाम (भाव) ही कर्मों के बंध का कारण होते हैं। शुभ भाव से शुभ कर्म एवं अशुभ भाव से अशुभ कर्म होते हैं। जिनालय में पापों का प्रक्षालन मन की विशुद्धता भावों की निराकूलता से होता है। णमोकार महामंत्र का संदेश यही है कि अहंकार छोड़कर परमात्मा को नमस्कार करना चाहिए।
आत्मा की शुद्धि और कल्याण का मार्ग सबसे बड़ा बाधक मोहनीय कर्म है, जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप से दूर करता है। हमें समझना चाहिए कि हम शरीर नहीं, आत्मा है। राजेश सेठी और राजकुमार सेठी के अनुसार आचार्य श्री संघ सानिध्य में 15,16 एवं 17 अप्रैल को श्री आदिनाथ जिनालय श्याम नगर में स्वयं-भू मंडल विधान पुण्यार्जक तारामणि देवी सेठी परिवार कोलकाता जयपुर की ओर से दोपहर से प्रारंभ हुआ।













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