धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए केवल वर्तमान में कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने इतिहास को खोजना, सहेजना और सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। यह विचार परम पूज्य मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज वर्धमानपुर शोध संस्थान द्वारा संचालित “वर्धमान 2550 प्रकल्प” के ध्वज अवलोकन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। पढ़िए ओम पाटोदी की विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए केवल वर्तमान में कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने इतिहास को खोजना, सहेजना और सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। यह विचार परम पूज्य मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किए। मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज वर्धमानपुर शोध संस्थान द्वारा संचालित “वर्धमान 2550 प्रकल्प” के ध्वज अवलोकन के अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज को अपने इतिहास के प्रति सजग रहना चाहिए और उसे सही रूप में संरक्षित करना चाहिए।
इतिहास के बिना अधूरी है समझ
मुनि श्री ने बताया कि भगवान महावीर ने “जियो और जीने दो” का संदेश उस समय दिया था, जब समाज में अनेक विपरीत मान्यताएं और कुरीतियां विद्यमान थीं। यदि हम इतिहास से उन परिस्थितियों को हटा देंगे, तो न तो भगवान महावीर के महत्व को सही ढंग से समझ पाएंगे और न ही उनके सिद्धांतों की गहराई को समाज तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इतिहास कभी भी अधूरा नहीं होना चाहिए। उसमें हर पक्ष का उल्लेख आवश्यक है, चाहे वह पक्ष में हो या विरोध में। यदि हम अपने विरोधियों का उल्लेख हटाते हैं, तो हमारी बात की विश्वसनीयता भी कम हो जाती है।
उदाहरणों से समझाया इतिहास का महत्व
मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे राम के साथ रावण, भगवान पार्श्वनाथ के साथ कमठ और मध्यकालीन इतिहास में मुगल आक्रांताओं का उल्लेख मिलता है। कुछ लोग इन प्रसंगों को नजरअंदाज करने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐसा करना इतिहास को कमजोर और विकृत बनाना है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा और विद्वान इतिहासकार वही होता है, जो सभी पहलुओं को जोड़कर सत्य को सामने लाए। अंत में मुनि श्री ने कहा कि यह ध्वज केवल एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कृति और सच्चे इतिहास को जीवित रखने का संकल्प है।
ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर वर्धमानपुर शोध संस्थान से ओम पाटोदी, स्वप्निल जैन, अभय पाटोदी (ज्ञान वर्धनी पाठशाला) तथा श्रीफल जैन न्यूज चैनल की संपादक रेखा जैन उपस्थित रहीं।













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