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सिद्धचक्र महामंडल विधान में 256 अर्घ्य समर्पित किए : सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ


 शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर…


आगरा। नगर में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर सेक्टर 7, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत श्री शांतिनाथ भगवान जी का अभिषेक हुआ और 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। पूजन में सामूहिक रूप से सभी इंद्र-इंद्राणियो ने अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त किया। संगीतमय विधान में संगीतकार विमल जैन एण्ड पार्टी के द्वारा मधुर से संगीतकार ने साथी कलाकारों द्वारा संगीतमय पूजन और विधान कराया। अपनी मनमोहक आवाज से पूजन और विधान में इंद्र और इंद्राणियों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।

हमारे अच्छे कर्मों को आने का सहारा बन जाते हैं

विधान के अंतर्गत बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया ने बताया कि कर्म सहित संसारी जीव हम सभी शुभ-अशुभ कर्मों के अधीन हैं। शुभ और अशुभ कर्म भी हमारे द्वारा उपार्जित किए जाते हैं। हम जैसे जैसे भाव करते हैं। वैसे-वैसे कर्मों का आगमन होता है। कर्मों का आना-जाना हमारे भावों पर ही आधारित है। यदि हम घर में दुकान अच्छे भाव करते हैं तो वह हमारे अच्छे कर्मों को आने का सहारा बन जाते हैं और यदि हम मंदिर में गुरु चरणों में बैठकर भाव करते हैं तो वह भाव हमारे पाप कर्मों को इकत्रित करते हैं। जैसे कर्म हम करते उसका वैसा ही फल भोगना पड़ता है।

कर्म गरीब अमीर को नहीं देखते

बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया ने कहा कि आप किसी से डरे या नहीं पर कर्मों से हमेशा डरना क्योंकि कर्मों के दरबार में पक्षपात नहीं होता l कर्म कभी छोटे बड़े जा भेद नहीं करते। जब कर्म उदय में आते हैं तो ग़रीब अमीर को नहीं देखते। श्री राम भगवान के जब कर्म उदय में आए तो राजपाठ को छोड़ चौदह वर्ष का वनवास भोगना पड़ा। जंगल-जंगल भटकना पड़ा। कितनी यातनाएँ पीड़ा सहन करनी पड़ी l जैन धर्म में ईसा आता है। भगवान प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ प्रभु ने पूर्व भव में खेत में हल चलाते समय छह घड़ी के लिए बैलों के मुख में रस्सी बाध दी थी ताकि वह हरि घास खेत की फसल ना खा पाए। जब कर्म बंधा तो तीर्थंकर पर्याय में उन्हें भी छह महीने भोजन नसीब नहीं हुआ। राजा श्रीपाल ने और सात सौ उप राजाओं ने एक मुनि का अनादर कर उनके शरीर पर थूक दिया था। जब बह कर्म उदय में आया तो सात सौ साथियों के साथ श्रीपाल को शरीर में कुष्ठ निकल आया। उन्होंने एक मुनि पर थूका था। सारी दुनिया ने उन सभी पर थूका। हमेशा अच्छे कर्म करते रहो। भगवान पल-पल आपका साथ देगा,आपके साथ रहेगा।

इस मौके संयोजक अशोककुमार जैन, अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब, अरुण जैन, महेश चंद जैन, अनिल आदर्श जैन, सतेंद्र जैन, राकेश जैन, सतेंद्र जैन राम प्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमोद जैन, विवेक जैन, अंकित जैन, संजीव जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद था।

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