1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन मुनिश्री श्रुतेश सागरजी, मुनिश्री शुश्रुति सागर महाराज के मंगल पावन सानिध्य में पूजा कर 256 अर्घ्य अष्ट किए। बल्देवगढ़ से पढ़िए, यह खबर…
बल्देवगढ़ । श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन मुनिश्री श्रुतेश सागरजी, मुनिश्री शुश्रुति सागर महाराज के मंगल पावन सानिध्य में पूजा कर 256 अर्घ्य अष्ट किए एवं विधानाचार्य बा ब्र संजय भैया आहार, दीपक ,पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में सौधर्म इंद्र द्वारा श्री जी को पांडुशिला पर विराजजमान कर अभिषेक एवं विश्वशांति कामनार्थ भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर मुनिश्री के मंत्रोच्चारण के साथ शांतिधारा करने का महा सौभाग्य अनुराग जैन, दिनेश जैन बिलासपुर को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने धर्मसभा में कहा कि सुंदरता और रूप पर अभिमान मत करो क्योंकि, नाम कर्म की उदय से यह शरीर हमें मिलता है।
सुंदर रूप, मधुर आवाज और स्वस्थ शरीर का अभिमान मत करो। यह सोचो भगवान की भक्ति कर हमने सुंदर काया पाई है। यदि हम सुंदर रूप वाणी या अपने शरीर का अभिमान करते हैं तो फिर हम दुर्गति के पात्र बनते हैं। उन्होंने कहा कि जो स्वस्थ शरीर प्राप्त होता है, यह सुंदर आवाज मिलती है, यह व्यक्ति के नाम कर्म के उदय के चलते मिलती है। इसलिए सिद्ध की आराधना मन, वचन और काया की एकता के साथ करो। ताकि मोक्ष दिशा की ओर कदम बढ़ सके। सोमवार को क्षेत्र परिसर पर आयोजित इस विधान के दौरान इंद्र-इंद्राणियों समूह द्वारा सिद्ध भगवान को गरबा नित्य भक्ति करते हुए मांडने पर 256 अर्घ्यं का समर्पण कर सिद्ध की आराधना की गई। इस दौरान हास्य, रति, शोक, भय, जुगुप्सा आदि के भी अर्घ्य समर्पण किए गए। सायंकल में पंच परमेष्ठी भगवान और सिद्ध चक्र विधान की आरती उतारी गई। युगल संगीतकार प्रवीण जैन प्रियंका जैन ने प्रभु के भजनो की प्रस्तुति दी। जिस पर मौजूद जैन श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हो गए। महा आरती का परम सौभाग्य अरविन्द्र जैन, संजय जैन, अक्षय जैन बलदेवगढ़ वालों को प्राप्त हुआ। तम्बोला प्रतियोगिता विजेताओं को पुरस्कार वितरण किए गए। जिसमें प्रथम स्थान दीपक हजारीबाग, द्वितीय गौरभ जैन, यश जैन, प्रदीप जैन तृतीय आस्था जैन को प्राप्त हुआ।













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