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लिया शुद्ध जल ग्रहण का नियम : संयम पथ की पहली सीढ़ी की ओर अग्रसर हुए इंजीनियर युवा


वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। वात्सल्य वारिधि राष्ट्रसंत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित अठारह त्यागियों की जन्मस्थली सनावद के एक इंजीनियर युवा त्याग, वैराग्य और संयम की गौरवशाली परंपरा की ओर अग्रसर हुए हैं। त्याग और वैराग्य की परंपरा के लिए प्रसिद्ध नगरी सनावद में इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 33 वर्षीय नवयुवक इंजीनियर शानिल, सुपुत्र संगीता एवं श्रीमंदर जैन (बडूद परिवार), सनावद ने संयम पथ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

शानिल अपने परिवार के साथ राजस्थान के शिवदासपुरा पहुँचे, जहाँ उन्होंने नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल समर्पित कर यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया तथा आजीवन शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को आहार भी प्रदान किया।

बताया गया कि शानिल ने यह नियम लेकर बीसवीं सदी के महान आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की कठिन संयम परंपरा का पालन करने वाले आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में संयम मार्ग की ओर पहला कदम बढ़ाया है।

इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने शानिल के इन त्याग और संयम भावों की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामनाएँ कीं।

शानिल का परिचय

जन्म : 12 जून 1992

नौकरी : एमडॉक्स कंपनी, पुणे में मैनेजर

शिक्षा : एम.टेक

परिवार में बचपन से ही धार्मिक संस्कार दिए गए हैं। उनके घर में अनेक वर्षों से स्वयं का भगवान का चैत्यालय स्थापित है। साथ ही उनके परिवार को पूर्व में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल विहार कराने का भी सौभाग्य प्राप्त हो चुका है।

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