श्री यशोदय तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर के सानिध्य में भगवान सुमितिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। इस अवसर पर धर्म सभा भी हुई। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। श्री यशोदय तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर के सानिध्य में भगवान सुमितिनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। प्रातःकालीन बेला में मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांति मंत्र, नित्यमह अभिषेक और शांतिधारा हुई। शांतिधारा का सौभाग्य महेंद्र मलैया एवं अभिनंदन बाजा को प्राप्त हुआ। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य विनोद सिंघई, आनंद सराफ, खेमचंद बाजा, वीरेंद्र लौडुआ को प्राप्त हुआ। विधि नायक विराजमान करने का सौभाग्य मुकेश अखिलेश सराफ को प्राप्त हुआ।

नंद्यावर्त की माटी की महिमा उत्कृष्ट
मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि नंद्यावर्त की माटी की महिमा उत्कृष्ट है। यशोदय तीर्थ क्षेत्र की माटी की ऊर्जा बहुत है। इस ऊर्जा में जिसने भी योगदान दिया, उसके भाग्य और किस्मत को उत्कृष्ट करने वाला होगी। श्री यशोदय तीर्थ की माटी में ही इतनी ऊर्जा है कि मंदिर की रक्षा तो माटी ही कर लेगी लेकिन माटी ने कहा कि मेरी ऊर्जा जैसे ही भक्त बढ़ाएगा तो उस ऊर्जा से भक्त की वो इच्छा पूर्ति होगी। जो पूरे भारत में नहीं है वो रचना बनेगी श्री यशोदय तीर्थ पर। पूज्य गुरुदेव ने प्रवचन में कहा कि इस क्षेत्र की ऊर्जा को जब आज प्रातः जांचा तो बताया कि यहां की मिट्टी की ऊर्जा 70000 है और जब इसमें श्री सम्मेद शिखर की चौबीस टोंको की माटी की स्थापना होगी, तब तो इसकी ऊर्जा बहुत बढ़ जाएगी। श्री यशोदय तीर्थ पर दान देने में जो पुण्य का अर्जन भक्त के भविष्य को ऐसी ऊंचाइयों पर पहुंचा देगा जो आपने सपने में भी नहीं सोचा होगा। शनिवार से पंचकल्याणक महोत्सव की क्रियाएं भी चौबीस समवशरण विधान के साथ-साथ चलेगी।













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