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10 जुलाई तक होगी सिद्धों की आराधना : मुनिश्री के सानिध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आरंभ 


श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। प्रातः पूज्य युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर…


मुरैना। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का 8 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। प्रातः पूज्य युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने मंडप, विधान मांडना, पांडाल एवं सभी पात्रों की शुद्धि का कार्यक्रम मंत्रोचारण के साथ संपन्न कराया। 3 जुलाई से 10 जुलाई तक निरंतर 8 दिन सिद्धों की पूजा भक्ति करते हुए अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।

पुण्य आपको मन की शांति और अपार वैभव देता है

सांसारिक प्राणी मोह माया के चक्कर में अपना पूरा जीवन व्यर्थ ही बर्बाद कर देता है। वह धन का संचय तो करता है लेकिन पुण्य का संचय नहीं करता। धन केवल आपको इस भव में सांसारिक सुख तो दे सकता है लेकिन, पुण्य आपको मन की शांति और अपार वैभव देता है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर जी ने यहां धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सभी जीवन की वास्तविकता को जानकर भी गलतफहमी में जी रहे है। सारी जिंदगी सपनों की दुनिया में जीते हुए जो कुछ हम जुटाते हैं वो सब यही धरा रह जाना है। चक्रवर्ती सम्राटों के पास अपार वैभव था, लेकिन जब उन्हें वैराग्य हुआ तो सारा वैभव उन्होंने एक क्षण में त्याग दिया। हम और आप मोह माया में पढ़े हुए हैं।

पुण्य का संचय हो और आपका परलोक भी सुधरेगा

मुनिश्री ने कहा कि आपका मस्तिष्क व्यवस्थित है तो आपको सारा संसार व्यवस्थित लगेगा। ज्ञान की बातें हम सब स्वीकार करते हैं पर उसे अंगीकार नहीं करते। जीवन की वास्तविकता को यदि हम श्रद्धा से स्वीकार करले, धर्म के सिद्धांतों को अंगीकार कर लें तो परिणति ही बदल जाएगी। हम सब को पता है कि अंतिम समय आने पर हम सबकुछ छोड़कर जाना है, कुछ भी साथ लेकर नहीं जाएंगे। फिर भी हम दिन रात कुछ न कुछ जोड़ने में ही लगे रहते है। बच्चों को उनके पाप पुण्य के अनुसार जो होगा वहीं मिलेगा, हमारा उनके लिए जोड़ना कुछ काम नहीं आएगा। आप धन का कितना भी संचय कर लें, लेकिन जब इस संसार से विदा होने का समय आएगा तब सब यहीं रखा रह जाएगा, केवल आपके अच्छे-बुरे कर्म ही साथ जाएंगे। हे! भव्य प्राणी अपनी इस चंचला लक्ष्मी का उपयोग अच्छे कार्यों में करो, प्रभु की भक्ति करो, ताकि पुण्य का संचय हो और आपका परलोक भी सुधरेगा।

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