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आदर्श नगर में हुआ भक्तिमय मंडल विधान का पूजन: साधुओं की संयम साधना जारी


नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। टोंक से पढ़िए, यह खबर…


टोंक। नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। राजेश पंचोलिया, गजराज लोकेश, संजय संघी ने बताया कि सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। चढ़ाए जाने वाले अर्घ्य का मंत्रोच्चार आचार्य श्री एवं मुनि हितेंद्र सागर जी ने कर भगवान के गुणों का वर्णन किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए समाधिस्थ आचार्य श्री विद्या सागर जी के शिष्य क्षुल्लक श्री ध्यान सागर जी पधारे। श्री जी के दर्शन कर आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री शीतलमति जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम नियम संल्लेखना चल रही हैं।

आर्यिका श्री शीतल मति जी एकांतर आहार ले रही हैं। वहीं आर्यिका श्री वत्सल मति जी दो उपवास के बाद एक आहार की कठोर तप साधना कर रही हैं। आप मात्र जल, दूध और मनुक्का पानी बहुत ही अल्प मात्रा में ले रही हैं। सभी प्रकार के अन्न और 5 रसों का त्याग कर दिया हैं। ब्रह्मचारिणी विमला दीदी सलूंबर धरियावद आचार्य श्री धर्म सागर जी के समय से संघस्थ होकर आपने वर्ष 1997 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से भिंडर पंच कल्याणक में सीधे आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री वत्सल मति जी बनीं। 27 वर्षों में हजारों उपवास किए है। प्रातःकाल आचार्य श्री के सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आचार्य श्री भक्ति भाव नृत्य द्वारा भव्य पूजन किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य का प्राप्त हुआ। श्री जी और आचार्य श्री की मंगल आरती का सौभाग्य केवल चंद, लोकेश (गजराज भैया), आशीष कुमार रक्षांश कुमार, अवि कुमार कलई वालों को प्राप्त हुआ।

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