आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री अनुश्रमण सागर जी की प्रवचन माला श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, विद्या पैलेस में चल रही है। इस अवसर पर मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि शरीर का आत्मा के बिना कोई अस्तित्व नहीं है और आत्मा की पहचान भी शरीर के माध्यम से ही है लेकिन ध्यान रखें, शरीर की कीमत आत्मा से ही है पर आत्मा की कीमत शरीर के बिना भी है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। शरीर और आत्मा अलग हैं। जब तक यह ज्ञान नहीं होगा, तब तक पूजा-पाठ और अभिषेक करना सब व्यर्थ है। संसार का कोई भी कार्य आत्मा को दृष्टि में रखकर करने से ही पुण्य का अर्जन होगा। शरीर की सुरक्षा की दृष्टि से किया कार्य ही पाप का कारण है। यह बात आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने प्रवचन में कही। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री अनुश्रमण सागर जी की प्रवचन माला श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, विद्या पैलेस में चल रही है।
आत्म चिंतन में लगाएं समय
मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि शरीर और आत्मा का संबध एक किराएदार के समान है। जिस प्रकार एक व्यक्ति किसी के मकान में किराए से रहता है, फिर भी उसके दिमाग में यह ही रहता है कि यह मकान मेरा नहीं है। वह उसी के अनुसार उस मकान में काम करवाता है, जितना उसे आवश्यक हो। आप सब को भी शरीर का उतना ही ध्यान रखना चाहिए, जितना जरूरी है। बाकी का ध्यान तो आत्म चिंतन पर रखना चाहिए। यह भी सच है कि शरीर का आत्मा के बिना कोई अस्तित्व नहीं है और आत्मा की पहचान भी शरीर के माध्यम से ही है लेकिन ध्यान रखें, शरीर की कीमत आत्मा से ही है पर आत्मा की कीमत शरीर के बिना भी है। प्रवचन के पहले भगवान का अभिषेक और शांतिधारा करने का लाभ मयंक मयूर एवं अभय जैन को प्राप्त हुआ। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन सभी अभिषेक मंडल वालों ने किया। शास्त्र भेंट का लाभ महिला मंडल ने लिया। मंच संचालन महामंत्री मयंक जैन ने किया। आगामी 22 अक्टूबर, रविवार को श्री जिन सहस्त्र नाम की विशेष आराधना की जाएगी।














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