आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के मार्गदर्शन में हुमड़ भवन तेलीवाड़ा में शुक्रवार को स्मार्ट गर्ल्स और नारी सशक्तीकरण पर सेमिनार का आयोजन हुआ। इसमें आर्यिका महायशमति ने कहा कि हमें अपने संस्कारों को नहीं छोड़ना है। स्वयं और परिवार के विकास के लिए काम करेंगे तो ही हमें जीवन की सफलताएं हासिल होंगी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
उदयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के मार्गदर्शन में हुमड़ भवन तेलीवाड़ा में शुक्रवार को स्मार्ट गर्ल्स और नारी सशक्तीकरण पर सेमिनार का आयोजन हुआ। इसमें आर्यिका महायशमति ने कहा कि कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। उन्होंने कहा कि हमें अपने संस्कारों को नहीं छोड़ना है। स्वयं और परिवार के विकास के लिए काम करेंगे तो ही हमें जीवन की सफलताएं हासिल होंगी।
‘स’ शब्द की व्याख्या की
इस दौरान उन्होंने ‘स’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि समय, स्वभाव, समाज, सोच और समर्पण को हमें गहराई से समझने की आवश्यकता है। शरीर की एक नाड़ी खराब हो जाती है तो पूरा शरीर रोगग्रस्त हो जाता है। उसी प्रकार नारी खराब होने पर पूरा खानदान, समाज बीमार हो जाता है। नारी को सभ्यता की संस्कृति नहीं भूलनी चाहिए। महायशमति ने बताया कि वह 13 वर्ष की आयु में जूडो कराटे को राष्ट्रीय प्रतियोगिता में केवल फल-दूध का सेवन किया। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय सिल्वर मेडल मिला। ब्लैक बेल्ट हासिल कर कॉलेज में छात्राओं को प्रशिक्षण भी दिया। 20 वर्ष की उम्र में संघ में शामिल होकर मात्र 29 वर्ष की आयु में दीक्षा ली।
परिवार में हो विचारों का आदान-प्रदान
समाज के शांतिलाल वेलावत और सुरेश पद्मावत ने बताया कि सेमिनार में मास्टर ट्रेनर दीपक चित्तौड़ा ने कहा कि महिलाएं विशेषकर बच्चियों को संस्कारित जीवन को जीते हुए सुरक्षित होने के लिए खुद को समझना व पहचाना जरूरी है। विचारों का आदान- प्रदान परिवार में नियमित होना चाहिए। आत्मविश्वास के साथ स्वाभिमान भी जरूरी है। माता-पिता दोस्त होते हैं, दुश्मन नहीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वल्लभ नगर विधायक प्रीति शक्तावत थीं। बता दें कि आचार्य वर्धमान सागर को आचार्य पद ग्रहण किए 33 साल पूरे हो गए हैं और उन्होंने 34वें साल में प्रवेश किया है। इसी के उपलक्ष्य में सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर की ओर से 6 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
नई पीढ़ी में संस्कार का अभाव
आचार्य वर्धमान सागर 32 साधुओं सहित बीसा हुमड़ भवन में विराजित होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। आचार्य ने शुक्रवार को कहा कि जीवन का हर कार्य धर्म से जुड़ा है। परिवार के प्रति आपकी यह भावना होना चाहिए कि उनके अनुभव से हमारा जीवन संस्कारित होगा। नई पीढ़ी में संस्कार का अभाव है। प्रचार मंत्री पारस चित्तौड़ा के अनुसार आचार्य ने कहा कि महिलाओं के लिए शील चारित्र सबसे बड़ी धन संपदा है। उन्होंने एक दृष्टांत से बताया कि मैना सुंदरी का विवाह उनके पिता ने एक कुष्ठ रोगी के साथ कर दिया। मैना सुंदरी ने जैन धर्म पर श्रद्धा को नहीं छोड़ा। सिद्ध चक्र मंडल विधान किया और श्रीजी के गंधोदक से अपने कुष्ठ पति सहित अनेक कुष्ठ व्यक्तियों का रोग दूर किया।













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