भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा, गजरथ महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में अंतिम दिन मोक्षकल्याणक आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को भी संबोधित किया। पढ़िए राजीव सिंघाई की विस्तृत रिपोर्ट..
पृथ्वीपुर। भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा, गजरथ महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में अंतिम दिन मोक्षकल्याणक आयोजित किया गया। प्रातः काल श्रीजी का अभिषेक किया गया,प्रातः 6:48 पर भगवान आदिनाथ स्वामी को मोक्ष हुआ।

मंदिर बनाने की खुशी अपार
पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि कौन है वो, जिसने मकान बनाते समय अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों, दुनिया को, गुरु को नहीं बुलाया होगा, लेकिन मंदिर बनाते समय तुम्हें जो खुशी हुई है उस खुशी का कोई छोर नहीं है। क्योंकि प्रभु अपने लिए नहीं, दुनिया के लिए जिये। मैं ही सुखी नहीं, दुनिया में सभी सुखी रहें, ऐसी महान आत्मा ही अमर रहती है। कोई चला जाये कोई इसलिए नही रोता, कोई क्या करके गया है, उसके उपकार के लिए रोता है। मरे हुए का नाम लेना अच्छा नहीं मानते, लेकिन जिसको निर्वाण प्राप्त हुआ है, उनका नाम लेना मंगल ही मंगल माना जाता है। साक्षात भगवान तो वर्षों पहले मोक्ष चले गए लेकिन ये भक्तों के भगवान सिद्धालय से उतर कर तुम्हारे लिए आये हैं, गुरु की सिफारिश से आये हैं। जब चाहे इनका दर्शन कर लो,जब चाहे इनका अभिषेक करके गंधोदक लगा लो और अपनी बीमारियां दूर कर लो। मैं बिना भगवान के दर्शन किए, बिना धोक दिए नगर से बाहर नही जाऊंगा क्योंकि तीन लोकों के नाथ मेरे नगर में मेहमान बनकर आए हैं।

विश्वशांति महायज्ञ का समापन
प्रवचन के उपरांत विश्वशान्ति महायज्ञ सम्पन्न हुआ, जिसमें विश्व के सभी प्राणियों को शांति प्राप्त हो, ऐसी कामना की गई।दोपहर में पूज्य गुरुदेव के मंगल सानिध्य में पंचकल्याणक पंडाल परिसर की श्री जी को विराजमान कर गजरथ परिक्रमा सम्पन्न हुई और यही शोभायात्रा हेलीपेड ग्राउंड से चलकर पृथ्वीपुर के श्री चन्द्रप्रभ जिनालय पर पहुंची। जहां पर जिन जिनबिम्बों की प्रतिष्ठा की गई है, उन्हें यथास्थान विराजमान किया गया। आज गुरुदेव का पड़गाहन एवं आहारदान देने का सौभाग्य अनिल, आर्जव, अंजू जैन चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।














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