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जो णमोकार महामंत्र जप ले उसका उद्धार होता है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी का कुंडलपुर से हुआ विहार


विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। कुंडलपुर (दमोह)से पढ़िए, यह खबर…


कुंडलपुर (दमोह)। विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया कि आज भी पूज्य बड़े बाबा के चरणों में अभिषेक करने श्रद्धालु भक्तों का ताता लगा रहा। मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने पूज्य बड़े बाबा की पावन नगरी, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की साधना स्थली में संत निवास के सामने प्रकृति की सुंदर छटा युक्त प्रांगण में बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्तों की शंकाओं का समाधान देते हुए कहा कि बार-बार व्रत की भावना भाना चाहिए, व्रत का स्मरण सदैव करना चाहिए। एक ब्रह्मचारिणी दीदी ने शंका रखी कि मुनि श्री आपने बड़े बाबा की इतनी एनर्जी कैसे पाई। मुनिश्री ने समाधान देते हुए कहा अपने आप को बड़े बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया, वहां जो बरस रहा था आत्मसात कर लिया। णमोकार मंत्र के विषय में की गई शंका का समाधान करते हुए मुनि श्री ने कहा यह स्वयं सिद्ध मंत्र है। सिद्ध नहीं करना पड़ता, मंत्र जपना होता है ।जप लिया तो काम बन गया। इसमें कोई भी बीजाक्षर नहीं सीधा-साधा मंत्र है। इसे सीधा पढ़ो या उल्टा पढ़ो जैसे पढ़ना हो पढ़ो किसी भी स्थिति में पढ़ो मारण उच्चारण में इसका कोई प्रयोग नहीं।

एक बार मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय

इस मंत्र के एक अक्षर पढ़ने से 60 सागर के कर्म का क्षय होता। एक बार णमोकर मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय हो जाता है। जो णमोकर मंत्र जप ले उसका उद्धार होता है। एक और ब्रह्मचारिणी दीदी ने मुनि श्री से निवेदन किया कि गुरुदेव कुंडलपुर आकर आपको इतना तो समय देना चाहिए। जिससे हम सारी बहनें संतुष्ट हो सके। मुनि श्री उपस्थित जनसमूह से ही पूछ बैठे। यह लोग क्या कभी संतुष्ट हो जाएंगे। मुनिश्री ने कहा कभी संतुष्ट होना नहीं। मुनि श्री ने बताया कि गुरुदेव ने कहा था लोगों को संतुष्ट करने कभी मत जाओ। उनकी प्यास जगाने जाओ। धर्म क्षेत्र में धर्म हेतु निष्ठा आवश्यक है धर्म भावना जगाओ। निष्ठा गहरी कीजिए बच्चों में भी कर्तव्य बोध जगाइए।

मुनिश्री का विहार बांदकपुर की ओर

पांच दिवसीय बड़े बाबा के चरणों में प्रवास के उपरांत मुनि श्री संघ का विहार बांदकपुर की ओर हो गया। रात्रि विश्राम देव डोगड़ा ग्राम में हो रहा। संभवतः मुनि श्री संस्कारधानी जबलपुर की ओर बढ़ रहे हैं। जहां 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है।

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