मुनि श्री 108 समयसागर जी महाराज एक प्रमुख दिगम्बर जैन संत हैं। वे परम पूज्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य हैं। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने समाधि से पहले उन्हें आचार्य पद देने की घोषणा की थी और आज कुंडलपुर में विधिवत सभी नियमों के साथ उन्हें आचार्य की गद्दी सौंपी जा रही है। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर /दमोह। जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समाधिमरण के बाद उनके शिष्य समय सागर जी महाराज जैन धर्म के अगले जैन संत शिरोमणि आचार्य होंगे। आज उनका आचार्य पदारोहण समारोह आयोजित होने जा रहा है। प्रथम मुनि शिष्य पूज्य प्रथम निर्यापक श्रमण मुनिश्री समयसागर जी महाराज अभी 65 साल के हैं। वह मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। जैन धर्म के लोग संत शिरोमणि आचार्य के बताए मार्गों पर ही आगे बढ़ते हैं। 27 अक्टूबर 1958 को शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के चिक्कोड़ी सदलगा में समय सागर जी महाराज का जन्म हुआ। पिता मल्लपा जैन और मां श्रीमंति जैन ने उनका नाम रखा शांतिनाथ । धार्मिक माहौल में पले-बढ़े समय सागर महाराज गृहस्थ जीवन में 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। 22 साल की उम्र में दूसरे नंबर के भाई विद्याधर ने गुरु दीक्षा ली। उन्हें नया नाम मिला विद्यासागर महाराज। 1975 में विद्यासागर महाराज को आचार्य पद मिला। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य धीरे-धीरे वैराग्य मार्ग की ओर अग्रसर हो गए। समय सागर जी महाराज हाईस्कूल में थे, तभी बड़े भाई विद्यासागर जी महाराज से प्रभावित होकर मोक्ष के मार्ग पर चल पढ़े। 17 साल की उम्र में 2 मई 1975 को उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत ले लिया। इसी साल दिसंबर में मध्य प्रदेश के दतिया सोनागिरी क्षेत्र में क्षुल्लक दीक्षा ली। इसके बाद 31 अक्टूबर 1978 को एलक दीक्षा जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरी जी, छतरपुर मध्य प्रदेश में ली है। वहीं, मुनि दीक्षा आठ मार्च 1980 को जैन सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरी जी, छतरपुर मध्यप्रदेश में ली है।
ये हैं इनके दीक्षा गुरु
आचार्य समय सागर जी महाराज के दीक्षा गुरु विद्यासागर जी महाराज रहे हैं। अब अपने दीक्षा गुरु की जगह वह जैन समाज के संत शिरोमणि आचार्य की जगह लेंगे।
विद्यासागर जी महाराज के हैं सगे भाई
सबसे खास बात यह है कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के बाद जैन धर्म के अगले आचार्य समय सागर जी महाराज उनके सगे भाई हैं। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, मुनि श्री समय सागर जी महाराज और मुनि श्री योगसागर जी महाराज गृहस्थ जीवन में सगे भाई हैं। इन तीनों के गृहस्थ जीवन के माता-पिता और दो बहनें भी आचार्य धर्मसागर जी से दीक्षित हुए थे।
पांच भाषाओं के ज्ञाता
उनके जीवन में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी, मराठी और कन्नड़ भाषाओं का ज्ञान भी है। उन्होंने लगभग 30,000 श्लोक प्रमाण संस्कृत और प्राकृत रचनाएँ की हैं, जिनमें जिन शासन सहस्त्रनाम हित मणिमाला भी शामिल है1।













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