अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…
अशोकनगर। क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान कहां है देवता उस मंदिर में जाते हैं जब भगवान सामने हो तो थोड़ा हंस लिया करें। अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े आदमी को संभालना है। हंसने वाले को संभालना है ये नरक जाने वाले हैं। रावण के पास धन था बुद्धि थी, शरीर निरोगी मिला। धन मिले अय्याशी में लगा दिया। बुद्धि मिली उससे भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठरकर फैंकने लगा। इन तीनों को संभालना। मैं जन्म-जन्म का बड़ा आदमी हूं। तुम्हें जो कुछ भी मिला है, अच्छे कर्म से मिला है ये तुम्हारे लिए अपने गुरु से मिलीं है। अब मेरा उपदेश नहीं मैं धनवान हूं बुद्धि मान निरोगी है तो अच्छा कर्म का परिणाम है। अब तुम्हारे लिए अपने आत्म की आवाज सुने। अब भविष्य में भी ऐसा ही चाहते हैं तो यही फार्मूला आगे लगाना है। आज अच्छा कर रहे हैं तो कल भी अच्छा होगा ये आत्मा की आवाज आएगी।
23को जाएगा अशोक नगर जैन समाज द्रव्य भेंट करने गोलाकोट
जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने बताया कि तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के श्री सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में ‘तप कल्याणक 23 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे होगा। सुभाषगंज प्रांगण से श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के नेतृत्व में सभी संस्थाओं का प्रतिनिधि मंडल अपने अपने निजी वाहनों से ‘अष्ट मंगल द्रव्य’ लेकर जा रहा है। इस दौरान मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ को कमेटी श्रीफल करेगी। कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनोज रन्नौद, श्रेयांस घैला सहित अन्य प्रमुख जनों ने सभी से अनुरोध किया है।
’तप कल्याणक पर होगी जैनेश्वरी दीक्षा
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दौरान महाराजा नाभी राय के दरबार का आयोजन होगा। आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जायेगी। राज व्यवस्था अषि मषि कृषि विद्या वाणिज्य शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य शिल्पा कला का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। इसके बाद नीलाजंना नृत्य नीलाजना का निधन और आदि कुमार का वैराग्य जैनेश्वरी दीक्षा मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज दी जायेगी।
सब कुछ छोड़कर यदि जायेंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते हैं’
मुनिश्री ने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जायेगा तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं। जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। ये मार्ग आनंद को देने वाला है। यहां मजा नहीं आया ये मजे से आगे आनंद देने वाले हैं। इन विकल्प जालों से आगे बढ़कर परम पद की आराधना करने का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान दर्शन चारित्र वीर्य चार को जान लिया शुद्ध आत्मा को जानने से हमें आगे कुछ भी नहीं बचा। जिसने अपने आत्म को जान लिया। भाग्यवानों के लिए है।
आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं
मुनिश्री ने कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे दरवाजे रोते हुए आये गरीब ना आवे रोगी ना आवे आ गया तो उनको भी ठीक कर दूंगा ये पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए हैं। ये मंदिर भाग्यवानांे के लिए है। भाग्यहीनो के लिए नहीं है। ये धर्म भाग् वानो के लिए है ये धर्म उनके लिए है। जिनके मन और तन सुखी है जैन कुल में उनका हुआ है, जो जन्म-जन्म के पुण्यवान हैं । इस पंचम काल का सबसे बड़ा दोष है कि यहां गरीबांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं। आज मंदिर में परेशान दःुखी और गरीब लोगांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिरों में देने वाले कम लेने ज्यादा आ रहे हो।
जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो, उसी से अतिशय बढ़ता है
कुछ लोग मंदिर में ख़ाली हाथ इसलिए जाते हैं कि भगवान को पता चले कि भक्त के पास कुछ नहीं है जैनी मंदिर में थाल भर-भर कर लेकर जाता है और खाली हाथ आता है। भगवान कहते हैं क्या बात है तू दूखी तो नहीं है। भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए अभी तक इतना दिया है कि तेरे लिए भी लेकर आया हूं मन्दिर कभी खाली हाथ नहीं जाना जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो। उसी से अतिशय बढ़ता है। उससे अतिशय बढ़ता चला जाता है। जितना भाग्यशाली बनकर पुण्यवान कर जिनालय की वंदना करने जाना मैं भाग्यवान हूं जो भगवान के पंच कल्याणक देखने आया हूं।













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