दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की 54वीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…
लगी लगन छूटे नहीं, जीव चोंच परि जाएंl
मीठा कहा अंगार में , जाहि चकोर चबाएंll
कबीर दास जी का यह दोहा जीवन के संकल्प और भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। इसमें वे जीवात्मा और परमात्मा के बीच गहरे प्रेम और जुड़ाव की बात करते हैं। दोहे के माध्यम से वे बताते हैं कि जब किसी का प्रेम या भक्ति सच्ची और प्रबल होती है, तो वह किसी भी बाधा से प्रभावित नहीं होती, और प्रेमी अपने प्रियतम को पाने के लिए हर परिस्थिति को सहर्ष स्वीकार करता है।
“लगी लगन छूटे नहीं” का अर्थ है कि सच्चे प्रेम या भक्ति की लगन इतनी मजबूत होती है कि वह किसी भी कठिनाई से नहीं टूटती। “जीव चोंच परि जाए” का संदेश है कि जीव अपने परमात्मा से मिलने के लिए किसी भी कष्ट को सहने को तैयार होता है। यह इस बात को दर्शाता है कि सच्चा प्रेम या भक्ति वह है, जिसमें व्यक्ति अपने प्रियतम के लिए हर मुश्किल से जूझने को तैयार हो।
संसार में सच्चे प्रेम, भक्ति और त्याग की राह आसान नहीं होती। यह रास्ता कांटों भरा होता है, लेकिन जो इसे अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठा और समर्पण से पार करता है, वही अंततः अपने उद्देश्य तक पहुँचता है। कबीर दास जी का यह दोहा जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सहर्ष स्वीकार करने और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित रहने की प्रेरणा देता है। वे यह सिखाते हैं कि सच्चा प्रेम और भक्ति बाहरी सुख-दुख से प्रभावित नहीं होते; चाहे अग्नि हो या कांटे, जब मनुष्य का मन किसी लक्ष्य में समर्पित हो जाता है, तो वह हर कठिनाई को पार कर सकता है।













Add Comment