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जब संत मिलते हैं तो सारे जग को खुशी होती है: आचार्य प्रज्ञा सागरजी ने संत मिलन के अवसर पर दी मंगल देशना 


मैं जब अपने से बड़ों से मिलता हूं तो क्षीर में नीर की तरह मिलने का प्रयास करता हूं और अपने से छोटों से मिलता हूं तो उन्हें अपने में मिलाने का प्रयास करता हूं क्योंकि क्षीर रूपी बड़ों में मिलकर मुझ पानी की कीमत बढ़ जाती है। यह बात आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी महाराज ने कही। कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


कोटा। मैं जब अपने से बड़ों से मिलता हूं तो क्षीर में नीर की तरह मिलने का प्रयास करता हूं और अपने से छोटों से मिलता हूं तो उन्हें अपने में मिलाने का प्रयास करता हूं क्योंकि क्षीर रूपी बड़ों में मिलकर मुझ पानी की कीमत बढ़ जाती है और छोटों को अपने में मिलाकर में उन्हें भी अपने जैसा बनाना चाहता हूं। रामपुरा में संत मिलन के बाद आयोजित धर्मसभा में अपना व्याख्यान देते हुए आचार्य प्रज्ञासागर जी ने सभा को संबोधित किया। सकल जैन समाज रामपुरा के अध्यक्ष चेतन जैन (रामगढ़) वाले ने बताया कि आचार्य प्रज्ञा सागर जी ने मंगलवार को रामपुरा आगमन की स्वीकृति प्रदान की थी पर संयोगवश बूंदी की ओर से भी मुनि श्री अनुपम सागर जी एवं मुनि श्री निर्माेह सागर जी के आगमन की सूचना प्राप्त हुई तब दोनों संघों के मिलन को महोत्सव में परिवर्तित करने के लिए आयोजन को नियोजित किया गया।

वात्सल्यमय दृश्य देखकर श्रावकों के नेत्र हुए सजल 

महामंत्री निर्मल पोरवाल ने बताया कि रामपुरा के ऐतिहासिक पीपल वृक्ष के नीचे संघों के मिलन के लिए मंच बनाया गया। प्रातः 8 बजे अग्रवाल मंदिर शास्त्री मार्केट के आचार्य संघ ने एवं रिद्धि सिद्ध से मुनि संघ ने विहार किया और लगभग 8.30 बजे सैकड़ों श्रावकों की उपस्थिति में दोनों संघों का आत्मीय मिलन हुआ। दोनों मुनियों ने आचार्य श्री की चरण वंदना की एवं आचार्य श्री ने दोनों मुनियों को अपने गले से लगाया। ऐसा वात्सल्यमयी दृश्य देखकर श्रावकों के नेत्र सजल हो गए। वहीं से शोभायात्रा प्रारंभ हुई। आचार्य श्री के 29 वर्ष बाद रामपुरा पुनरागमन के प्रतीक स्वरूप 29 दंपत्तियों द्वारा क्रमशः 29 थाल में आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। आर्यसमाज रोड होते हुए श्री सूरजबाई दिगंबर जैन छात्रावास की धर्मशाला नवीन परिसर में शोभायात्रा पहुंच कर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। जहां सकल दिगंबर जैन समाज समिति कोटा के अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, विमल नान्ता, मनोज जैसवाल, नरेश वेद, निखिलेश सेठी, पीयूष बज, राजेंद्र गोधा ने आचार्य संघ को श्रीफल भेंट करते हुए दीप प्रज्वलन की मांगलिक क्रिया को संपादित किया। गुरु पाद प्रक्षालन का सौभाग्य निखिलेश कनिका सेठी परिवार को प्राप्त हुआ।

श्रावक भी अपनी प्रवृत्ति शुभ में लगाने का प्रयास करें 

मुनि श्री अनुपम सागर जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि पूज्य आचार्य श्री से हम पहले भी मिल चुके है किन्तु हर बार मिलने के बाद इनके व्यक्तित्व से हमारी निकटता और बढ़ जाती है। आचार्य श्री ने रामपुरा के श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि जब श्रावक आपस में मिलते हैं तो केवल दोनों मिलने वालों को खुशी हो सकती है पर जब दो साधक आपस में मिलते हैं तो पूरे जग को खुशी होती है। श्रावक भी अपनी प्रवृत्ति शुभ में लगाने का प्रयास करें और जब भी कोई त्यागी साधक रामपुरा आएं तो उसकी सेवा सुश्रुषा में अपना नाम पहले नंबर पर दो। सभी नियम लो कि वर्ष में हम कम से कम 100 साधकों के दर्शन अवश्य करेंगे और एक जिनवाणी का स्वाध्याय भी करेंगे। ये सब वो नियम है जिनसे हमारी शुभाशुभ प्रवृत्ति निरंतर बढ़ती रहेगी।

‘विरासत से मिलो’ कार्यक्रम बुधवार को 

मीडिया प्रभारी राकेश जैन चपलमन के अनुसार 3 दिसंबर को दोपहर 2 बजे आचार्य संघ श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के तत्वावधान में आयोजित ‘विरासत से मिलो’ कार्यक्रम में जैन कला दीर्घा का अवलोकन करेंगे एवं तत्पश्चात जेल में कैदियों को वात्सल्य संबोधन प्रदान करेंगे। जिनेंद्र पापड़ीवाल ने बताया कि आगामी दिवसों में आचार्य संघ की अतिशय क्षेत्र केशोराय पाटन एवं अतिशय क्षेत्र जहाजपुर की पद वंदना का आयोजन भी प्रस्तावित है।

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