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भव भोगों से विरक्त हों तब होता है सम्यक दर्शन: मुनि श्री महिमा सागर जी संघ का मंगल प्रवेश 


आचार्य श्री देशभूषण सागर जी के शिष्य मुनि श्री महिमा सागर जी (6 पिच्छी) का सिद्धवरकूट की ओर मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों रेलवे गेट कोठी रोड पर पहुंच कर मुनि संघ की अगवानी की। साथ ही नगर में विराजमान आचार्य विनम्र सागर जी के संघस्थ मुनिराजों ने मुनिसंघ की मोटक्का चौराहे मंगल अगवानी की। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। नगर का पुण्य कहें या नगर का सौभाग्य, जहां निरंतर दिगंबरत्व का झंडा बुलंद रखने वाले साधु संतों का सानिध्य नगरवासियों को मिल रहा है। आचार्य श्री देशभूषण सागर जी शिष्य मुनि श्री महिमा सागर जी (6 पिच्छी) का सिद्धवरकूट की ओर मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों रेलवे गेट कोठी रोड पर पहुंच कर मुनि संघ की अगवानी की। साथ ही नगर में विराजमान आचार्य विनम्र सागर जी के संघस्थ मुनिराजों ने मुनिसंघ की मोटक्का चौराहे मंगल अगवानी की। मुनि संघ के नगर के जिनमंदिरों के दर्शन के बाद आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन किए। संत भवन में सभा की शुरुआत आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। आचार्य विनम्र सागर जी के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य दर्शित रजत कुमार जैन बड़ूद परिवार को प्राप्त हुआ। समाजजनों ने पुण्यार्जक परिवार का सम्मान किया। अगले क्रम में आचार्य विनम्र सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि सात व्यसन से रहित, सात भयांे से रहित है लेकिन, न्याय से सहित है। न्याय नीति का पालन करता है। अन्याय के काम नहीं करता न्याय के काम करता है। जब विरक्ति आती है तो फिर आसक्ति नहीं रह जाती है। सात भयो से रहित, सात व्यसनों से रहित और भव भोगों से विरक्त हों तब जाकर के सम्यक दर्शन होता है। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे। आचार्य श्री के आहारदान का सौभाग्य वीरेंद्रकुमार जैन मुंशी परिवार को प्राप्त हुआ।

मुनि श्री महिमा सागर जी संघ का मंगल विहार

सनावद नगर में प्रातः सिद्धवरकूट के ओर से विहार कर नगर में पधारे मुनि श्री महिमा सागर जी ने ससंघ मंगल विहार बेड़िया की की ओर किया। वे निरंतर इंदौर से मंगल विहार कर मांगी तुंगी पधार रहे हैं।

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