श्री दिगम्बर जैन गोकुल नगर मंदिर में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान का आयोजन किया गया। विधान के अंतर्गत 44 अर्घ्य भगवान पार्श्वनाथ का गुणगान कर चढ़ाए गए। इस अवसर पर मुनि श्री ने धर्म सभा में कहा कि हमारे पूर्वजों में दान दिया तो आज हमें इतने प्राचीन तीर्थों के दर्शन हो रहे हैं। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। श्री दिगम्बर जैन गोकुल नगर मंदिर में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान का आयोजन किया गया।
विधान के अंतर्गत 44 अर्घ्य भगवान पार्श्वनाथ का गुणगान कर चढ़ाए गए।
इस अवसर पर मुनि श्री ने धर्म सभा में कहा कि हमारे पूर्वजों में दान दिया तो आज हमें इतने प्राचीन तीर्थों के दर्शन हो रहे हैं।
अगर हमारे पूर्वज मंदिर आदि नहीं बनवाते तो हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों का इतिहास ही नहीं पता चलता।
जितने नए मंदिर बना सकते हैं, उतने बनाने चाहिए।
जब घर में 10 सदस्य हैं और 10 गाड़ियां है, तब यह समय की आवश्यकता है तो फिर मंदिर क्यों नहीं समय की आवश्यकता है । ।
ये कार्यक्रम हुए
समाज रविंद्र जैन और नीलेश जैन ने बताया कि विधान के पूर्व भगवान का अभिषेक और शांति धारा की गई।
सभी मांगलिक क्रियाएं ब्रह्मचारी भावेश जैन द्वारा की गईं। विधान में 60 मंगल कलश स्थापित किए गए।
इस मौके पर रेखा संजय जैन,कमलेश जैन का समाज की ओर से सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में समाज के हंसमुख गांधी, नमीष जैन और वैभव नगर समाज के श्रावक उपस्थित थे।
इन्हें मिला लाभ
विधान के सौधर्म इंद्र बनने का लाभ अल्पना जयेश जैन को ,धनपति कुबेर बनने का लाभ अनुषा अंकित सिंघई को, महायज्ञनायक बनने का लाभ सपना विजय जैन को प्राप्त हुआ।
मुनि श्री का पाद प्रक्षालन अरुण जैन द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन खूबचंद जैन ने किया ।
मुख्य कलश और चार मंडप कलश स्थापना कल्पना रिचा जैन, चंद्रप्रभा जैन, सीमा बजाज, आकांक्षा जैन, नीतू जैन द्वारा की गई ।
शास्त्र भेंट कर्ता रत्नत्रय ग्रुप वैभव नगर थे। अभिषेक – शांतिधारा करने का लाभ रविन्द्र जया जैन,एस सी सिंघई , मुकेश जैन ,अशोक अंकित सिंघई प्राप्त हुआ ।
श्रावक श्रेष्ठी बनने का लाभ बी के चंद्रप्रभा जैन, विनय डाली जैन, संजय सपना वेद को प्राप्त हुआ ।













Add Comment