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6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन : विश्वशांति महायज्ञ एवं मानस्तंभ महामस्तकाभिषेक से हुआ समापन


सलूंबर जिले के करावली गांव में दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य युगल मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल’ सागवाड़ा के कुशल निर्देशन और तत्वाधान में श्री सकल बीसा नरसिंहपुरा समाज करावली के आयोजन 6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन का समापन हुआ। पढ़िए अशोक जेतावत की यह विशेष रिपोर्ट..


धरियावद। सलूंबर जिले के करावली गांव में दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सुशिष्य युगल मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल’ सागवाड़ा के कुशल निर्देशन और तत्वाधान में श्री सकल बीसा नरसिंहपुरा समाज करावली के आयोजन 6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन और सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण स्थित ऊतंग श्री मानस्तंभ में दो वलयों में चारों दिशाओं में विराजित श्री महावीर स्वामी और श्री सुपार्श्वनाथ की 8 जिन प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम गुरुवार को विश्वशांति महायज्ञ, श्रीजी की शोभायात्रा एवं संगीतमय धुन के साथ भक्तिभाव पूर्वक संपन्न हुआ।

इंद्र परिवारों ने किया जलाभिषेक

दिगंबर जैन समाज के अशोक कुमार जेतावत ने आयोजन समिति के पदाधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया कि गुरुवार प्रातः श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का जलाभिषेक सामूहिक सभी इंद्र परिवारों द्वारा किया गया। श्रीजी की महाशांतिधारा का लाभ शांतिलाल गौतम लाल टाया परिवार और युगल मुनिराज के पाद प्रक्षालन का लाभ हीरालाल कचरावत परिवार को मिला। इसी तरह मानस्तंभ में श्रीजी के महामस्तकाभिषेक में पूर्व दिशा में विराजित प्रभु श्री महावीर स्वामी के मस्तक पर प्रथम कलश करने का सौभाग्य मणिलाल, चुन्नीलाल टाया, रौशन लाल, प्रवीण कुमार, ऋषभ कुमार, कुशल कुमार, प्रदीप कुमार टाया परिवार को मिला। दक्षिण दिशा में कस्तूरचंद टाया परिवार, पश्चिम दिशा में किशोर कुमार कचरूलाल संगावत परिवार, उत्तर दिशा में रमेश कुमार दिनेश कुमार रूपचंद संगावत परिवार ने शांतिधारा की। इसी तरह, द्वितीय वलय की कोटि शिला पर पूर्व दिशा में विराजित श्री सुपार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक महावीर कुमार रूपावत परिवार, दक्षिण में स्वर्गीय धनराज जी अमरावत परिवार, पश्चिम दिशा में शांतिलाल भागचंद टाया परिवार और उत्तर दिशा में मदनलाल पूनमचंद संगावत परिवार ने किया। इसके बाद उपस्थित सभी श्रावक परिवारों ने अपनी कुछ राशि समर्पण करते हुए साधारण कलश करने का सौभाग्य प्राप्त किया। स्वामी वात्सल्य के साथ 6 दिवसीय कार्यक्रमों का समापन हुआ।

परिणाम होते हैं सरल

6 दिवसीय श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के समापन अवसर पर आयोजित आशीर्वाद एवं धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिश्री अर्पित सागर जी महाराज ने कहा कि जिस मंदिर सम्मुख मानस्तंभ होता है, उसमें दर्शन करने वाले व्यक्तियों के मंदिर में प्रवेश के पूर्व मानस्तंभ के दर्शन होते हैं। इससे जीव अपनी अहं भावना और मैं-पना का त्याग कर मंदिर में प्रवेश करता है। इससे उसके परिणाम सरल हो जाते हैं और अपनी आत्मा एवं जिनेंद्र देव के गुणों के प्रति भक्ति का भाव उत्पन्न होता है।

मोक्ष का पुरुषार्थ

इसी तरह पूज्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज ने उपस्थित समस्त इंद्र-इंद्राणियों, श्रावक-श्राविका और श्रद्दालुजन को संबोधित करते हुए कहा कि अचेतन जिनेंद्र भगवान प्रतिमा का एक सामान्य जल से भरे कलश से अभिषेक करने के बाद वह जल गंधोदक के रूप में पवित्र हो जाता है। वह अपने मस्तक (ललाट) पल लगाने योग्य हो जाता है। सिद्ध चक्र महामंडल विधान पूजन की महता बताते हुए पूज्य मुनिश्री ने कहा कि यही गंधोदक महासती मैना सुंदरी ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान की आराधना करने के पश्चात श्रीपाल राजा और उनके साथ अन्य 700 कुष्ठ रोगियों पर छिड़का था। इससे उनके भयानक कुष्ठ रोग का नाश करके रोग दूर कर लिया था और निरोगी काया को प्राप्त किया। आप सभी ने भी सिद्ध भगवंतों की महाअर्चना और आराधना की है, तो निश्चित रूप से आप सबने भी अपने भावी पर्याय में मोक्ष में स्थान आरक्षित करने का पुरुषार्थ कर लिया है। आप सभी उपस्थित जनों को जीवन में धर्म अभिवृद्धि मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हैं और सभी से क्षमायाचना करते हैं।

युगल मुनिश्री का मंगल विहार शुक्रवार को

करावली गांव में विराजित दिगंबर मुनि श्री अपूर्व सागर जी, मुनि श्री अर्पित सागर जी, क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी महाराज ससंघ का शुक्रवार 17 मई को ओरवाड़िया गांव के लिए प्रातः 5.30 बजे मंगल विहार होगा। सुबह 7 बजे ओरवाड़िया में संघ का मंगल प्रवेश होगा। अशोक कुमार जेतावत ने संघ सान्निध्य से बताया कि युगल मुनि संघ का आगामी ग्रीष्मकालीन प्रवास ओरवाड़िया, खरका, गींगला आदि आसपास के गांवों में संभावित है, जिससे इन गांवों के श्रावक-श्राविकाओं को पुण्यार्जन कर धर्म लाभ प्राप्ति का अवसर मिलेगा।

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