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विश्व में शांति हेतु क्षमा धर्म अपनाने की आवश्यकता : पर्यूषण पर्व के अवसर पर सामूहिक क्षमा याचना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रम।


अंबाह में जैन बगीची में आयोजित क्षमावाणी महोत्सव में पूर्व विधायक सत्य प्रकाश सखवार ने उपस्थित लोगों को क्षमा धर्म अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में सामूहिक क्षमा याचना, भजन-नृत्य और बालिका एवं बहू मंडल की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने धार्मिक एवं सामाजिक संदेश को जीवंत किया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…


अंबाह। “क्षमा मांगना और क्षमा देना वीरता का प्रतीक हैं। जब व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगता है, तभी उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत होती है।” यह संदेश सत्य प्रकाश सखवार, पूर्व विधायक ने बीती रात जैन बगीची में आयोजित क्षमावाणी महोत्सव एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत नगर पालिका अध्यक्ष अंजलि जिनेश जैन और महिला मंडल द्वारा भगवान महावीर स्वामी की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण से हुई। प्रमुख वक्ता पंडित मुकेश शास्त्री ने कहा कि क्षमा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, भाईचारा और सौहार्द का मार्ग है। उन्होंने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान क्षमा याचना वर्षभर की भूलों और गलतियों को सुधारने का अवसर प्रदान करती है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बच्चों ने भजनों पर नृत्य कर पर्यूषण पर्व का संदेश रंग-बिरंगे रूप में प्रस्तुत किया। बालिका मंडल और बहू मंडल ने कथात्मक प्रस्तुतियों और संगीत के माध्यम से क्षमा, प्रेम और भाईचारे की भावना को दर्शकों तक पहुँचाया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सामूहिक क्षमा याचना था, जिसमें उपस्थित लोगों ने “मिच्छामि दुक्कडम्” का उच्चारण कर एक-दूसरे से माफी मांगी। नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और दया की भावना को जगाता है।

भाजपा जिला उपाध्यक्ष और जैन कमेटी अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि क्षमा और बैर दो विरोधी धाराएं हैं; क्षमा जीवन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। उन्होंने प्रेरित किया कि महापुरुषों और तीर्थंकरों ने पर्युषण पर्व की शुरुआत उत्तम क्षमा धर्म से ही की है।

सामूहिक क्षमा याचना की, गले मिलकर माफी मांगी 

संपूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक क्षमा याचना की, गले मिलकर माफी मांगी और स्वल्पाहार का आनंद लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों, वरिष्ठ वक्ताओं के प्रवचनों और सामूहिक क्षमा याचना ने यह स्पष्ट किया कि क्षमा धर्म अपनाकर ही व्यक्ति और समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का स्थायी वातावरण स्थापित किया जा सकता है। अंत में सत्य प्रकाश सखवार ने उपस्थित लोगों से कहा, “क्षमा धर्म का पालन करके हम न केवल अपने जीवन में सुख और शांति ला सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र में भी स्थायी सौहार्द और सहयोग की भावना स्थापित कर सकते हैं।”

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