चारित्र चक्रवती प्रथमाचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण पट्ट परम्परा के तृतीय पट्टाचार्य धर्मशिरोमणी आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के 56 वें आचार्य पदारोहण वर्ष 1969 सन् 2024 के समय भावभीनी विनयांजली। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट में आचार्य श्री १०८ धर्म सागर जी महाराज की जीवन यात्रा…
जीवन परिचयनाम – श्री चिरंजीलाल , श्री कजोडीमल ,
जन्म दिनांक पौष शुक्ला पूर्णिमा संवत 1970 12 जनवरी सन् 1914 श्री धर्मनाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक के दिन गंभीरा राजस्थान में हुआ। आप पिता बख्तावरमल, उमराव देवी की बगिया के अनमोल मोती थे।
व्रत – नियम –
आपने व्रत नियम आचार्यकल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से 15वर्ष की अल्प आयु में शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया व दो प्रतिमा व्रत का नियम आचार्य कल्प श्री 108 वीरसागर जी महाराज से इंदौर मध्यप्रदेश में लिया। वह संयम पद पथ पर बढ़ते गए और सप्तम प्रतिमा व्रत आचार्य कल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से बडऩगर में लिया।
आपने क्षुल्लक दीक्षा चैत्र कृष्णा 7 संवत 2000 को आचार्य श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से बालूज, महाराष्ट्र में हुई और आपका नाम क्षुल्लक श्री 105 भद्र सागर जी महाराज से रखा गया। आपकी ऐलक दीक्षा वैशाख माह संवत 2007 में आचार्य श्री 108 वीरसागर जी महाराज फुलेरा, राजस्थान में ग्रहण की।
दीक्षा, नामकरण ,आचार्य पद-
त्याग तप और संयम पथ की ओर बढ़ते हुए सर्वोत्कृष्ट पद आपकी मुनि दीक्षा कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी संवत 2008 आचार्य श्री 108 वीरसागर जी महाराज द्वारा फुलेरा राजस्थान में हुई। आपका नामकरण हुआ मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज। आपको फाल्गुन शुक्ल अष्टमी दिनांक 24 फरवरी 1969 को तृतीय पट्टाधीश पद पर आचार्य श्री108 धर्म सागर जी महाराज स्थान श्री महावीर जी, राजस्थान में सुशोभित किया गया।
प्रमुख दीक्षाएं
जिस दिन इन्हें आचार्य पद व तृतीय पट्टाधीश पद पर सुशोभित किया गया उसी दिन नूतन आचार्य श्री के कर कमलों से 11 दीक्षाएं प्रदान की गई। वे 11दीक्षार्थी ये थे-
मुनिश्री 105 महेंद्रसागर जी महाराज, मुनिश्री 108 श्री अभिनंदनसागर जी महाराज, मुनिश्री 108 संभवसागर जी महाराज, मुनिश्री 108 श्री शीतलसागर जी महाराज, मुनिश्री 108 यतीन्द्र सागर जी महाराज, मुनिश्री 108 वद्र्धमान सागर जी महाराज, एवं आर्यिका 105 श्री गुणमति माताजी,आर्यिका 105 श्री विद्यामति माताजी, साथ ही क्षुल्लक 105 श्री गुणसागर जी महाराज, क्षुल्लक 105श्री बुद्धि सागर जी महाराज के क्षुल्लिका 105 श्री अभयमति माताजी को दीक्षा प्रदान की।
आचार्य श्री के कर कमलों से 76 दीक्षाएं हुई। जिनमें वर्तमान में प्रमुख शिष्यों में वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 1969 श्री महावीर जी में दीक्षा प्रदान की गई थी। पूज्य मुनि श्री 108 अमित सागर जी महाराज, जिन्हें सन 1984 में अजमेर में दीक्षा प्रदान की गई थी। इसके साथ ही आर्यिका 105 श्री शुभमति माताजी जिनको सन 1972 अजमेर में आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई थी। वर्तमान में माताजी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज के संघ में हैं। आर्यिका 105 श्री श्रुतमति माताजी जिन्हें सन 1974 दिल्ली में दीक्षा प्रदान की गई थी। आर्यिका 105 श्री शिवमति माताजी जिन्हें 1974 दिल्ली में ही दीक्षा प्रदान की गई थी। आर्यिका 105 श्री सुरत्नमति माताजी जो वर्तमान में सम्मेद शिखर तीर्थ पर विराजमान है। इनको सन 1967 मुजफ्फरनगर में दीक्षा प्रदान की गई थी। वर्तमान में यह 6 साधु विद्यमान है।













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