पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड चौराहा अंबाह में वीतराग शासन बालिका मंडल की ओर से विन्रम एकेडमी संस्कार शिविर लगाया जा रहा है। जो ग्रीष्मकाल में आचार्य विनम्र सागर के चातुर्मास के दौरान के समय से लगातार प्रत्येक वर्ष लगाया जा रहा है। वीतराग शासन बालिका मंडल की ओर से जिसमें बच्चे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अभिषेक, शांति धारा, पूजन, आरती करना सीख रहे हैं। पढि़ए सौरभ जैन की पूरी रिपोर्ट…
अंबाह। पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड चौराहा अंबाह में वीतराग शासन बालिका मंडल की ओर से विन्रम एकेडमी संस्कार शिविर लगाया जा रहा है। जो ग्रीष्मकाल में आचार्य विनम्र सागर के चातुर्मास के दौरान के समय से लगातार प्रत्येक वर्ष लगाया जा रहा है। वीतराग शासन बालिका मंडल की ओर से जिसमें बच्चे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अभिषेक, शांति धारा, पूजन, आरती करना सीख रहे हैं। शिविर के दौरान नीति सौरभ जैन ने कुमारी राजुल जैन और उनकी टीम की सराहना की ओर से बताया कि बच्चे को अगर उपहार न दिए जाए तो वह कुछ समय तक रोएगा, लेकिन अगर संस्कार न दिए जाएं तो वह जीवन भर रोएगा।
वर्तमान समय में धर्म के संस्कार के बीजारोपण हेतु संस्कार शिविर लगाना बहुत जरूरी है। वर्तमान की युवा पीढ़ी निरंतर धर्म आराधना, धर्म संस्कार से विमुख होती जा रही है। यदि धर्म को बचाना है तो युवा वर्ग को जगाना और धर्म से जुडऩा अनिवार्य है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का सबसे कीमती तोहफा है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती है और संस्कार मनुष्य के जीवन का सार हैं।
अच्छे संस्कारों द्वारा ही मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण और विकास होता है और जब मनुष्य में शिक्षा और संस्कार दोनों का विकास होगा, तभी वह परिवार, समाज और देश का विकास कर सकेगा। परन्तु आज के समय में शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही सीमित रह गई है, जबकि शिक्षा का असली उद्देश्य चारित्रिक ज्ञान है, जो आज की इस भागदौड़ वाली जिंदगी में हम भूल चुके हैं।













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