विरागोदय तीर्थ पथरिया में आयोजित धर्मसभा में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने विनय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विनम्रता ही उन्नति का द्वार है और विनयशील व्यक्ति गुरुजनों की विशेष कृपा का पात्र बनता है। पढ़िए रत्नेश जैन/ राजेश रागी बक्सवाहा की ख़ास रिपोर्ट…
विरागोदय तीर्थ, पथरिया में आयोजित धर्मसभा में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि विनय आत्मिक विकास की नींव है। यह सज्जनता का प्रतीक, उन्नति का आधार और सिद्धि की कुंजी है। विनयवान व्यक्ति समाज में सम्मान प्राप्त करता है और अपने गुणों से शत्रुओं को भी मित्र बना लेता है।
आचार्यश्री ने कहा कि विनयशील ही सच्चा विद्या अधिकारी होता है और आत्मा की पवित्रता का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने श्रोताओं को प्रेरणा दी – “उठना है तो झुकना सीखो।”
आचार्य श्री की देशना का लाभ लिया
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने भावपूर्वक प्रवचन श्रवण किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल भी विरागोदय तीर्थ पधारे और आचार्य श्री की देशना का लाभ लिया। उन्होंने ससंघ दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पथरिया एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं ने भी पूज्य गुरुदेव के चरणों में वंदना अर्पित कर पुण्यार्जन किया।













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