संतोष नगर के वासियों को संतोष नहीं है, लोभ है। संघ के आगमन से लोभ आ गया, वह चाहते हैं कि संत सानिध्य समागम में ज्यादा दिन संघ को रोक कर विशेष भगवान की अर्चना आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करें। यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि आचार्य श्री वर्धमान सागर ने संतोष नगर जैन मंदिर की धर्म सभा में प्रकट की। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
उदयपुर। संतोष नगर के वासियों को संतोष नहीं है, लोभ है। संघ के आगमन से लोभ आ गया, वह चाहते हैं कि संत सानिध्य समागम में ज्यादा दिन संघ को रोक कर विशेष भगवान की अर्चना आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करें। यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि आचार्य श्री वर्धमान सागर ने संतोष नगर जैन मंदिर की धर्म सभा में प्रकट की।
ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया इंदौर के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आप लोग कल्याण मंदिर का विधान पूजन करना चाहते हैं। विशेष पूजन से जीवन में परिवर्तन लाना होगा। कल्याण मंदिर विधान 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान के जीवन पर आधारित है। उन्होंने दस भव विगत जन्मों में सगे भाई का उपसर्ग सहन किया है। विधान के दौरान आपको भी व्यापार आदि लौकिक कार्यों के लोभ आदि पर नियंत्रण रखकर विधान का लाभ लेना है।

संयम का पालन करना जरूरी
अभी आपने आर्यिका माता जी का अहिंसा के महत्व का उपदेश सुना। आप हिंसा से कैसे बचें उसके लिए संयम का पालन करना जरूरी है। संयम के पालन से जीवन सुरक्षित रहता है। जीवन सुरक्षित रखने पर धर्म सुरक्षित रहेगा और धर्म सुरक्षित रहने पर आत्मा सुरक्षित रहेगी। आचार्य श्री ने एलुमिनियम के बर्तन उपयोग पर मार्मिक शब्दों में चिंता प्रकट की। एल्युमिनियम के बर्तन से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद है। इसके पूर्व शिष्या आर्यिका श्री देशना मति जी ने प्रवचन में अहिंसा का महत्व प्रतिपादित किया। मंगलाचरण के बाद चित्र अनावरण श्रीपाल धर्मावत एवम् अतिथियों द्वारा किया गया। आचार्य श्री चरण प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेट करने का सौभाग्य सुशील कारवां परिवार को प्राप्त हुआ। संचालन प्रकाश सिंघवी द्वारा किया गया।













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