इचलकरंजी में वीर सेवा दल शाखा जैन बोर्डिंग के सदस्यों ने मासिक बैठक के उपरांत मैदान में तड़पती गर्भवती घोड़ी को देखकर तुरंत डॉक्टर बुलाया। समय पर इलाज और णमोकार महामंत्र के जाप से घोड़ी को नया जीवन मिला। इस जीवदया कार्य ने समाज में जैन धर्म की करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाया। पढ़िए अभिषेक अशोक पाटिल की रिपोर्ट…
इचलकरंजी (महाराष्ट्र) में दिगंबर जैन बोर्डिंग परिसर में वीर सेवा दल शाखा की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक समाप्त होने के बाद जब सभी सदस्य बाहर निकल रहे थे, तभी मैदान में एक गर्भवती मूक घोड़ी तड़पती हुई मिली। उसकी पीड़ा देखकर सभी सदस्य तुरंत सक्रिय हो गए और तुरंत डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि घोड़ी के गर्भ में मृत शिशु है, जिसकी वजह से उसका जीवन संकट में है। वीर सेवा दल के सदस्यों ने आवश्यक सामग्री जुटाई और डॉक्टर की सहायता से मृत बच्चे को बाहर निकालकर घोड़ी के प्राणों की रक्षा की।
इलाज के दौरान सदस्यों ने घोड़ी के कानों में णमोकार महामंत्र का जाप किया, जिससे उसे अद्भुत शांति और संबल मिला। कुछ ही देर में घोड़ी स्वस्थ होकर खड़ी हो गई। मृत शिशु का अंतिम संस्कार कर वीर सेवा दल के सदस्यों ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का पाठ किया। इस जीवदया कार्य की पूरे समाज में सराहना हो रही है। जैन धर्म की अहिंसा और करुणा की परंपरा को जीवंत करने वाले वीर सेवा दल के इन सदस्यों का अभिनंदन हर स्तर पर किया जा रहा है और उन पर शुभकामनाओं की वर्षा हो रही है।













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