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आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के वर्षायोग कलश स्थापना रविवार को: आचार्य श्री विराग सागरजी के जीवन कृतित्व पर विद्वत संगोष्ठी 


रविवार की दोपहर बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का वर्षा योग कलश स्थापना समारोह कृषि उपज मंडी प्रांगण में होगा। आचार्य श्री कोकृषि उपज मंडी प्रांगण लाया जाएगा, जहां भव्य वर्षा योग कलश स्थापना समारोह होगा। शनिवार को आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री विराग सागर महाराज के जीवन कृतित्व पर विद्वत संगोष्ठी हुई। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


रामगंजमंडी। रविवार की दोपहर बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का वर्षा योग कलश स्थापना समारोह कृषि उपज मंडी प्रांगण में होगा। जिसके लिए भक्तों का आना शुरू हो गया है। आचार्य श्री को दोपहर की बेला में बैंडबाजांे एवं जयघोष के साथ कृषि उपज मंडी प्रांगण लाया जाएगा, जहां भव्य वर्षा योग कलश स्थापना समारोह होगा। शनिवार को आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री विराग सागर महाराज के जीवन कृतित्व पर विद्वत संगोष्ठी हुई। जिसमें दूर-दराज से आए विद्वत जनों ने भाग लिया।

विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ आचार्य श्री विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया एवं शास्त्र भेंट किया गया। इस विद्वत्त संगोष्ठी में 10 विद्वानों ने भाग लिया एवं आचार्य श्री के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सभी विद्वत जनों ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंट किया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्रमोद कुमार सुरेश कुमार बाबरिया दोतडा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही विशेष थाल सजाकर भक्ति भाव के साथ आचार्य श्री का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया।

विद्वत जन ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री विराग़ सागर महाराज के कारण श्रमण परंपरा दिखाई दे रही है। इनके विराट व्यक्तित्व के कारण श्रमण परंपरा जीवित है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विराग सागर महाराज के अंदर समता दिखाई देती थी। उन्होंने समता निष्प्रहता के साथ निर्वाहन किया। जीवन कृतित्व प्रकाश डालते हुए विद्वत जन ने कहा कि आचार्य श्री ने देशभक्ति में योगदान देते हुए शाकाहार एवं व्यसन मुक्ति का अभियान चलाया।

जीवन कृतित्व पर एक स्मारिका का प्रकाशन होना चाहिए

आचार्य श्री ने 1993 में श्रेयांश गिरी में विधायक सुंदरलाल को व्यसन एवम मांसाहार का त्याग कराया। उन्होंने टीकमगढ़, भिंड आदि अनेक स्थानों पर इसके लिए विशेष अभियान चलाया। इस मुहिम से अनेक लोगों ने शाकाहार अपनाने एवम व्यसन मुक्त रहने का संकल्प लिया। उन्होंने इस इसके लिए 2007 में 10 हजार विद्यार्थियों की रैली की। इसमें 88 साधु संतों ने अपना सानिध्य प्रदान किया एवं गुरुदेव ने शाकाहार का प्रचार-प्रसार किया। साथ ही सभी बच्चों ने शाकाहारी रहने का संकल्प लिया। सभी विद्वानों ने आचार्य श्री से इस बात का भी निवेदन किया कि आचार्य श्री के जीवन कृतित्व पर एक स्मारिका का प्रकाशन होना चाहिए। दोपहर के सत्र में विद्वत्त जन ने कहा कि आचार्य श्री विराग सागर महाराज ने जीवंत कृतियों का निर्माण किया। जिससे भारतवर्ष का जैन समाज ही नहीं अपितु विश्व भी गौरवान्वित हुआ। आचार्य श्री ने समाज को जोड़ने का काम किया। आचार्य श्री पद प्रतिष्ठा से निर्लेप थे। आचार्य श्री ने अनेक तीर्थ का निर्माण कराया। आचार्य श्री ने कहा था कि एक हजार तीर्थ का निर्माण करने से एक तीर्थ का जीर्णाेद्धार कराओ उतना ही पुण्य मिलेगा। आचार्य श्री ने अनेक तीर्थ का जीर्णाेद्धार कराया। विद्वत जन ने कहा तीर्थंकरों को नहीं देखा चलते-फिरते तीर्थ के रूप में विराग सागर महाराज को देखा।

गुरुदेव ने सिखाया समान व्यवहार होना चाहिए

इस अवसर पर आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि हमने आचार्य श्री को निकट से देखा है। हमारा उनसे हृदय से जुड़ा व्यवहार था। उन्होंने कहा आचार्य श्री ने हमें बच्चों की तरह पढ़ाया। मैं तो कहता हूं उनसे अच्छा और कोई नहीं मिल सकता। आचार्य श्री के भीतर उन्मुक्ति और गंभीरता थी। दिगंबर संत के लिए यह उपदेश दिया जाता है कि प्रेम तो करना पर्याय से नहीं द्रव्य से रखना। गुरुदेव ने हमें सिखाया सभी से समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने हमें कहा था कि आशीर्वाद देने में कभी पीछे मत हटाना। कोई नमोस्तु ना करें तो भी उसे आशीर्वाद देना। नियति को कोई नहीं बदल सकता। अगर नियति को बदल सकता तो मैं उन्हें जाने नहीं देता।

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