गुजरात विश्वविद्यालय में आचार्य श्री सुनील सागर जी के सान्निध्य में वर्णी विकास सभा का राष्ट्रीय अधिवेशन एवं संगोष्ठी संपन्न हुई। दो दिवसीय आयोजन में वर्णी संदेश मासिक पत्रिका और स्मारिका का विमोचन हुआ तथा 7 विद्वानों और 2 संस्थाओं को प्रभावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट…
अहमदाबाद। वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में गुरुकुल और पाठशालाओं के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से “वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा” के समापन पर गुजरात विश्वविद्यालय प्रांगण में राष्ट्रीय अधिवेशन, संगोष्ठी और स्मारिका विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में संपन्न हुआ।
दो दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन विद्वानों द्वारा मंगलाचरण संजय शास्त्री तिगोड़ा ने किया और दीप प्रज्वलन के बाद सत्र प्रारंभ हुआ। विद्वानों ने गणेश प्रसाद वर्णी जी के जीवन, उनके शिक्षण कार्य और समाजहित में योगदान पर विचार प्रस्तुत किए। द्वितीय सत्र में विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता विजय शास्त्री सागर ने की।
दूसरे दिन खुला अधिवेशन आयोजित हुआ जिसमें वर्णी संदेश मासिक पत्रिका एवं वर्णी स्मारिका का विमोचन किया गया। सात विद्वानों और दो संस्थाओं को “वर्णी प्रभावना पुरस्कार” से सम्मानित किया गया, जिनमें पं. जीवंधर शास्त्री जबलपुर, कैलाशचंद टीला सागर, प्रेमचंद डीमापुर, पं. कडोरीलाल वण्डा, अरविंद जैन बंडा, मनीष विद्यार्थी सागर, पं. राजकुमार जैन कर्द, उदासीन आश्रम सागर और वर्णी विद्यालय मड़ावरा शामिल रहे।
मुख्य संयोजक चंद्रेश शास्त्री (भोपाल) और संयोजक पं. रमेश शास्त्री (अहमदाबाद) ने कार्यक्रम का संचालन किया। अधिवेशन में पं. जयंत शास्त्री सीकर को अध्यक्ष, पं. विनोद जैन एलआईसी सागर और डॉ. अरविंद जैन इंदौर को कार्याध्यक्ष मनोनीत किया गया।
आचार्य श्री सुनील सागर जी ने अपने मंगल आशीर्वचन में कहा कि गणेश प्रसाद वर्णी जी ने शिक्षा और धर्म को एक सूत्र में बांधकर सैकड़ों गुरुकुलों की स्थापना की। आज वर्णी विकास सभा उसी मिशन को पुनर्जीवित कर रही है, जो समाज में नैतिकता और ज्ञान का दीप जलाए रखेगा। अधिवेशन में देशभर से आए लगभग 60 विद्वानों और उनके परिवारों ने सहभागिता की। अंत में आचार्य श्री ने सभी पुरस्कृत विद्वानों और नवीन कार्यकारिणी को आशीर्वाद दिया।













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