दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरि का त्रिदिवसीय वार्षिक जलविहार मेला विविध कार्यक्रमों के साथ 13 दिसंबर से प्रारंभ होगा। यहां महामस्तकाभिषेक महोत्सव मनाया जाएगा। प्रतिदिन सुबह अभिषेक पूजन शांतिधारा, सायंकालीन आरती आदि कार्यक्रम होंगे। पढ़िए बकस्वाहा से रत्नेश जैन रागी की खबर…
बकस्वाहा। प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि का त्रिदिवसीय वार्षिक जलविहार मेला विविध कार्यक्रमों के साथ 13 दिसंबर से प्रारंभ होगा। यह मेला 15 दिसंबर तक आयोजित होगा। पुर्णिमा के दिन इसका समापन होगा। जैन तीर्थ नैनागिरि कमेटी के प्रचार मंत्री सुरेश सिंघई सुनवाहा ने बताया कि बरदत्तादि ऋषिराजों की निर्वाण तथा भगवान पारसनाथ की समवशरण स्थली नैनागिरि में 140 वर्ष पूर्व पन्ना महाराज के आदेश से 29 अपै्रल 1885 से शुरू किए गए तीन दिवसीय जैन तीर्थ नैनागिरि मेला (1885-2024) की गौरवशाली परंपरा के तहत वार्षिक जल विहार मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर 13 सौ वर्ष पूर्व देशी पाषाण से नैनागिरि में निर्मित तथा 51वें जिनालय में विराजमान नेमीनाथ, आदिनाथ और अजितनाथ तथा 37 वें जिनालय में विराजमान युगल पार्श्वनाथ की पांच पंचतोर्थी प्राचीन प्रतिमाओं का सर्वसिद्धि प्रदायक भव्यतम महामस्तकाभिषेक होगा।
140 साल पुराना पारंपरिक मेले का होगा आगाज
140 वर्षों से निरंतर भर रहे नैनागिरि मेला, रथोत्सव जल विहार का विशाल आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर दिनांक 13 दिसंबर को सुबह 51वें जिनालय में विराजमान भगवान का महामस्तकाभिषेक होगा। दोपहर एक बजे नैनागिरि केंद्रित पारस समवशरण क्षेत्र के जैन समाज के पदाधिकारियों की बैठक होगी।
प्राचीनतम प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक होगा
14 दिसंबर शनिवार को 37वें जिनालय में विराजमान प्राचीनतम प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। 15 दिसंबर को 40वें पार्श्वनाथ चौबीसी जिनालय में विराजमान तदाकार भगवान पार्श्वनाथ का बहत्तर वर्षीय के साथ ही पारसनाथ देशना स्थली में विराजमान तीर्थंकर नेमीनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी का द्वितीय महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।
रथोत्सव और जल विहार के साक्षी बनेंगे जैन धर्मावलंबी
15 दिसंबर को अपरान्ह में रथोत्सव जलविहार एवं एक बजे पर्वत के विशाल प्रवेश द्वार का जीर्णाेद्धार शिलान्यास सौजन्यकर्ता विमलचंद्र सीतादेवी जैन पटेरा (दमोह) द्वारा किया जाएगा।
रोज होंगे धार्मिक आयोजन
नैनागिरि में प्रतिदिन सुबह अभिषेक पूजन शांतिधारा, सायंकालीन आरती, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस पावन अवसर पर धर्मप्रेमी बंधुओं से कमेटी ने अपील की है कि सपरिवार पधार कर सातिशय पुण्यार्जन करें।













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