समाचार

14 जून से वर्द्धमानपुर अमृत महोत्सव की होगी शुरूआत: प्रदर्शनी, व्याख्यानमाला और ऐतिहासिक प्रकाशन होंगे


वर्द्धमानपुर प्रकटोत्सव और सौभाग्य दिवस की गौरवगाथा आज भी लोग याद करते हैं। 75 वर्ष पहले यहां की धरती ने इतिहास के रत्न प्रकट किए थे और इसका सिरवी बा का खेत साक्षी बना था। यहां 75 वर्षों से वैभव का प्रकटन जारी है। इसी पर आधारित इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर…


इंदौर। जब धरती अपने गर्भ में छिपे इतिहास को उजागर करती है, तब कोई सामान्य दिन एक ऐतिहासिक पर्व बन जाता है। ऐसा ही एक सौभाग्यशाली दिन रहा, 14 जून 1950। जब इंदौर से मात्र 95 किमी दूर स्थित बदनावर की पावन भूमि विशेष रूप से हरजी बां सिरवी के खेत से प्राचीन भारत की 62 दुर्लभ जैन प्रतिमाएं प्रकट हुईं। इस महत्वपूर्ण घटना ने नगर के समृद्ध अतीत को पुनर्जीवित किया और आज भी यह दिन ‘वर्द्धमानपुर प्रकटोत्सव’ एवं ’सौभाग्य दिवस’ के रूप में स्मरण किया जाता है। यहां से प्राप्त प्रतिमाओं में आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी, तीर्थंकर प्रतिमा के परिकर, यक्ष यक्षिणी, सरस्वती देवी, चक्रेश्वरी देवी, अच्छुप्ता देवी, अंबिका देवी, जैसी अनेक प्राचीन मूर्तियां शामिल थीं, जो प्रमाणित करती हैं कि बदनावर (प्राचीन वर्द्धमानपुर) कभी एक धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समृद्ध नगर रहा है।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विविध प्रयास होंगे

वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के प्रमुख ओम पाटोदी ने बताया कि मूर्तियों के प्रकटन का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि वर्षों से नगर के विभिन्न क्षेत्र से सैकड़ों मूर्तियां, शिलालेख और स्थापत्य अवशेष निकलते रहे हैं। इनसे परमारकालीन इतिहास, धार्मिक परंपराओं और समाज की आध्यात्मिक चेतना का भव्य प्रमाण मिलता है। दुर्भाग्यवश इतनी ऐतिहासिक महत्ता के बावजूद यह स्थल आज भी अपेक्षित सरकारी संरक्षण से वंचित है। फिर भी नगर के प्रबुद्ध नागरिक और शोध संस्थान इस अमूल्य धरोहर को सहेजने के लिए निरंतर सक्रिय है। इस वर्ष को ‘वर्द्धमानपुर अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए समाजजन और शोध संस्थान द्वारा जनजागरूकता, इतिहास-प्रसार एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विविध प्रयास किए जाएंगे।

युवाओं को इतिहास खोज और संरक्षण से जोड़ा जाएगा

राजेश जैन (फूलजी बा), राजमल सूर्या, सुरेंद्र मूणत, राजेश मोदी, विजय बाफना, महेंद्र सुंदेचा, राजेंद्र सराफ, अनिल लुनिया, सर्वेश मंडलेचा, सौरभ जैन (बिट्टू), पवन पाटोदी, सुशील मोदी, ललित गोधा, स्वप्निल जैन एवं ओम पाटोदी सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत नगरवासियों को इतिहास से जोड़ने के लिए व्याख्यानमाला, प्रदर्शनी और प्रकाशन कार्य किए जाएंगे। वहीं विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवाओं को इतिहास खोज और संरक्षण से जोड़ा जाएगा। नगर की धरोहर को जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए जन-संवाद कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चलाई जाएगी। सदस्यों ने कहा कि यह प्रयास केवल इतिहास को याद करने भर का नहीं, बल्कि एक गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करने की यात्रा है। जिसमें पूरे नगर के प्रबुद्ध जनों के साथ ही इतिहास के जानकारों की सहभागिता अपेक्षित है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page