सनावद में दीक्षार्थी ब्र. अनिल भईया बांसवाड़ा वाले की गोद भराई युगल मुनिराजों के सान्निध्य में संपन्न हुई। यह कार्यक्रम आगामी 5 अक्टूबर को इंदौर में होने वाली भव्य जैनेश्वरी मुनि दीक्षा के पूर्व आयोजित किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने कहा कि संयम ही जीवन का सार है और दीक्षा से बड़ा कोई संस्कार नहीं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सनावद में रविवार को दीक्षार्थी ब्र. अनिल भईया बांसवाड़ा वाले की गोद भराई का आयोजन युगल मुनिराजों के सान्निध्य में हुआ। यह आयोजन आगामी 5 अक्टूबर 2025 को इंदौर के पंचबायलती मंदिर में होने वाली भव्य जैनेश्वरी मुनि दीक्षा के पूर्व संस्कार स्वरूप किया गया।
इस अवसर पर मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का सार ज्ञान और संयम में निहित है। दीक्षा से बड़ा कोई संस्कार नहीं है और यही मोक्ष मार्ग का द्वार है। उन्होंने कहा कि योग मिलने पर उसका उपयोग करना ही जीवन की सार्थकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत त्रय आचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। तत्पश्चात संगीता पाटोदी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। अखंड सौभाग्यवती महिलाओं ने पाटले पर स्वास्तिक बनाकर भईया जी को बैठाया। ब्र. अनिल भईया ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य मोक्ष की साधना है और इसी भाव को समझते हुए उन्होंने संयम मार्ग की ओर कदम बढ़ाया है। प्रशांत चौधरी, संगीता पाटोदी, सुदेश जटाले और कमल केके ने मधुर भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सकल जैन समाज, मुनि त्यागी समिति और नगरवासियों ने भईया जी की गोद भराई कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत चौधरी ने किया तथा प्रवक्ता सन्मति जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन सनावद की त्याग और संयम की परंपरा को चरितार्थ करने वाला रहा।













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