संसार दो शब्दों से चल रहा है, एक है – आसक्ति दूसरा है विरक्ति। जब व्यक्ति घर से उबने लगता है तब आसक्ति विरक्ति में बदल रही होती है और उसे जागृति के भाव आते हैं। आसक्ति यानी जो आ तो सकती है लेकिन जा नहीं सकती। साधुओं को तप में आसक्ति होती है। महापुरुष के जीवन का चरम है, वैराग्य।उक्त विचार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में व्यक्त किए। पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट…
इंदौर। संसार दो शब्दों से चल रहा है, एक है – आसक्ति दूसरा है विरक्ति। जब व्यक्ति घर से उबने लगता है तब आसक्ति विरक्ति में बदल रही होती है और उसे जागृति के भाव आते हैं। आसक्ति यानी जो आ तो सकती है लेकिन जा नहीं सकती। साधुओं को तप में आसक्ति होती है। महापुरुष के जीवन का चरम है, वैराग्य।उक्त विचार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में व्यक्त किए। आपने कहा कि जैसे कुत्ते के काटने के बाद आदमी को हाइड्रोफोबिआ हो जाता है तो वह पानी से दूर भागता है। ऐसे ही एक बार कभी किसी को मान का कुत्ता काट जाए तो आदमी हमेशा सामने वाले से दूर रहता है। ऐसे ही जब भी इंसान से दान की बात करो तो वो धार्मिक क्षेत्र से ही भागने लगता है।
मुनिवर कहते हैं कि दान नहीं दे पाओ तो कोई बात नहीं कम से कम उसकी अनुमोदना अवश्य करो। एक बार प्रभु जी से प्रार्थना करिएगा कि विनम्र सागर जो सोच कर आए हैं उनका प्रकल्प अवश्य पूरा हो। आपके हमारे संबंध खून के नहीं है, धर्म से यह संबंध मिला है, मैं आपको धर्मी समझ कर संवाद करता हूं। आपने कहा कि हर आदमी का अपना पुण्य होता है। लड़ाई हमेशा पाप- पुण्य में होती है अपने क्रोध को आकार दो, लेकिन कभी किसी का सार्वजनिक अपमान मत करना। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से पूजन करने का सौभाग्य दिगंबर जैन परवार सभा के सदस्यों को मिला।
इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, कैलाश चंद जैन नेताजी, गौतम जैन, मनीष नायक, सतीश डबडेरा, सतीश जैन, विनय चौधरी, प्रमोद जैन अभय वकील साहब, आनंद जैन आदि विशेष रूप से मौजूद थे। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं महाराज भी मंच पर विराजित थे। प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से आचार्य श्री जी की पूजन, 9:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग में होते हैं। धर्म सभा का सफल संचालन भरतेश बड़कुल ने किया।













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