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वात्सल्य पर्व का संदेशः मुनि, धर्म व संस्कृति की रक्षा करेंः मुनि श्री निरीह सागर महाराज

  • भगवान श्रेयांसनाथ के निर्वाण कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित
  • हर्षोल्लास पूर्वक मनाया वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन
  • राखी सजाओ प्रतियोगिता के प्रतिभागी हुए पुरस्कृत

न्यूज़ सौजन्य – राजीव सिंघई

 

मडावरा (ललितपुर)। धर्म व संस्कृति रक्षा का वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर वर्णीनगर मडावरा में आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर मुनिराज के परम प्रभावक अष्टम निर्यापक मुनि श्री अभय सागर, मुनि श्री प्रभात सागर,मुनि श्री निरीह सागर महाराज का अमृत वर्षायोग धर्म प्रभावना पूर्वक चल रहा है। वर्षायोग के अंतर्गत वात्सल्य पर्व रक्षाबंधन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। प्रातःकालीन बेला में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं भगवान श्रेयांसनाथ का पूजन किया गया और पुण्यार्जक परिवारों व अपार जनसमूह ने निर्वाण लाडू चढ़ाया। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य नीलेश जैन दुकान वाले परिवार, संदीप, अश्विन जैन परसोरिया सागर परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य डा. रजित, डा. स्वप्निल जैन सागर को प्राप्त हुआ।
इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री निरीह सागर महाराज जी ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व वात्सल्य का पर्व है।वात्सल्य पर्व हमें मुनि, धर्म व संस्कृति की रक्षा करने का संदेश देता है। इस दिन सात सौ मुनियों का उपसर्ग दूर हुआ था। जैनधर्म संस्कृति और संस्कारों को बतलाता है। वात्सल्य पर्व हमें यही बतलाता है कि हम देव, शास्त्र और गुरु की सेवा करने के लिए हमेशा आगे रहें। मुख्य निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य सुरेशचंद्र, राजीव कुमार सिलौनिया परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री अभय सागर महाराज को राखी समर्पित करने का सौभाग्य डा. राकेश जैन, सुधीर सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री प्रभात सागर महाराज को राखी समर्पित करने का सौभाग्य राजकुमार जैन अप्सरा परिवार एवं मुनिश्री निरीह सागर महाराज को राखी समर्पित करने का सौभाग्य खुशबू जैन जबलपुर को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर राखी सजाओ प्रतियोगिता आयोजित की गई। निर्णायक मंडल में प्रमुख रूप से पं. गजेंद्र सौंरया,अनुज जैन खन्ना रहे। चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने ब्र. मनोज भैया “लल्लन” जबलपुर का स्वागत सम्मान श्रीफल, शाल ओढ़ाकर किया। आभार चातुर्मास समिति के महामंत्री डां० राकेश जैन सिंघई ने व्यक्त किया।

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