सनावद में पर्युषण पर्व के छठे दिन सुगंध दशमी का पर्व बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया गया। युगल मुनिराज के सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा और धूप खेवन के कार्यक्रम हुए। साध्य सागर जी महाराज व विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म का महत्व समझाते हुए आत्मशुद्धि व प्राणी-रक्षण का संदेश दिया। पढ़िए सन्मति जैन काका की खास रिपोर्ट…
सनावद नगर में विराजमान युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के निर्देशन में पर्युषण पर्व का आयोजन बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ हो रहा है। छठे दिन बड़े मंदिर जी एवं संत निलय में पंचामृत अभिषेक पूजन हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य अशोक कुमार परिन विभव जैन परिवार को तथा बड़ा अभिषेक करने का सौभाग्य कल्याण कुमार भाई कमल कुमार परिवार को प्राप्त हुआ।
साध्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय-दमन करना ही वास्तविक संयम है। इन्द्रियों पर नियंत्रण के बिना प्राणी-संयम संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इन्द्रिय संयम आत्मा को निर्मल और शांत बनाता है।
वहीं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने कहा कि संयम केवल बाहरी व्यवहार नहीं, बल्कि मन, वचन और शरीर पर अनुशासन स्थापित करने की साधना है। यह हमें सांसारिक मोह-माया से दूर कर आत्मज्ञान और शांति की ओर ले जाता है।
धूप खेवन कर सुगंध दशमी का पर्व मनाया
शाम को समाजजनों ने नगर के समस्त जैन मंदिरों में धूप खेवन कर सुगंध दशमी का पर्व मनाया। णमोकार धाम, सिद्धाचल पोदनपुरम और ओंकारबाग मोरटक्का में भी धूप अर्पित की गई। जैन मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को विधिपूर्वक करने से अशुभ कर्मों का क्षय होता है और पुण्य बंध की प्राप्ति होती है, जिससे स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। पूरे वातावरण में भक्ति और सुगंध का अद्भुत संगम देखने को मिला।













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