सनावद में पर्वाधिराज पर्यूषण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। मुनि साध्यसागर जी महाराज व मुनि विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने अहंकार त्याग और विनम्रता धारण करने का संदेश दिया। पढ़िए सन्मति जैन काका की खास रिपोर्ट…
सनावद में दिगंबर जैन समाज द्वारा पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना को समर्पित रहा। मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि मान और अहंकार नाशवान हैं। धन, दौलत, रूप और यश सब क्षणभंगुर हैं, अतः अभिमान त्यागकर विनम्रता अपनानी चाहिए।
मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी महाराज ने भी प्रवचन में कहा कि नाशवंत वस्तुओं के पीछे भागने से बेहतर है परिग्रह और अभिमान का त्याग करना। सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखना ही सच्चा धर्म है।
इस अवसर पर बड़े मंदिर में पंचामृत अभिषेक, सामूहिक पूजन व शांति धारा संपन्न हुई, जिसका सौभाग्य अनंत संजय कुमार कासलीवाल परिवार को मिला। मंगलाचरण राहुल स्वास्तिक ने किया। दोपहर में तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन तथा सायंकालीन समय में प्रतिक्रमण, गुरु भक्ति, आरती, भजन संध्या व प्रश्न मंच का आयोजन हुआ। प्रिय कारणी महिला मंडल ने प्रतियोगिता भी कराई।
👉 आज आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का 76वां अवतरण दिवस भव्य उत्साह के साथ मनाया जाएगा। प्रातः पंचामृत अभिषेक, सामूहिक पूजन, विनयांजलि सभा व प्रभावना वितरण सहित विविध धार्मिक आयोजन होंगे।













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