तीर्थंकर भगवान का जन्म होता है संसारी प्राणी की भांति जरा बुढ़ापा और मृत्यु नहीं होती वैराग्य दीक्षा तप से मोक्ष जाते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह बात कही। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर….
पीपल्दा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रीमदजिनेंद्र पंच कल्याणक के तृतीय दिवस दीक्षा तप कल्याणक मनाया गया धर्म सभा में आचार्य श्री ने बताया कि सभी को धर्म के प्रति अनुराग होना चाहिए। श्री आदिनाथ से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों, महान आत्माओं ने धर्म के प्रति अनुराग रखकर मोक्ष प्राप्त किया। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंदनाथ महामुनिराज के तप कल्याणक के अवसर पर पीपल्दा की धर्म सभा में प्रगट की। उन्होंने कहा कि सभी को तीर्थंकरों की धर्मदेशना उपदेश से सृजित जिनवाणी को श्रवण कर, चिंतन, मनन ,और अनुसरण करने का पुरुषार्थ करना चाहिए भगवान की दिव्य ध्वनि से प्रसारित रत्नत्रय धर्म सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र को जीवन में धारण कर अभिन्न अंग बनाने से जीवन बनता है। धर्म के बिना जीवन अधूरा होता है। श्री चंद्रनाथ भगवान आठवें तीर्थंकर है। इन्होंने रत्नत्रय धर्म से परम पद को प्राप्त किया है। णमोकार मंत्र का जीवन में बहुत महत्व है। सभी को हर क्रिया में पंच परमेष्ठि का स्मरण करने से कष्ट, विपत्ति आपदा दूर होती है। पीपल्दा ग्राम में जिनालय विशाल मंदिर बनाने से यह शहर हो गया। तीर्थंकर का जन्म होता हैं किंतु जरा, बुढ़ापा और मरण नहीं होता। वह दीक्षा संयम वैराग्य धारण कर तप से उन्हें मोक्ष होता है।
राज्याभिषेक दीक्षा विधि संस्कार का भी मंचन
सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक के वर्धमान सभागार में आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन और गृह त्याग का मंचन किया गया। बजरंगलाल महाजन, मनोज जैन सोगानी ने बताया कि आचार्य श्री के सान्निध्य में दीक्षाविधि संस्कार, तप कल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया। दीक्षा के दौरान पांडाल में मौजूद हजारों जैन समाज के लोगों ने श्री चंद्र महामुनि एवं आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज के जयकारों से पंडाल जिनालय गुंजायमान किया। कार्यक्रम स्थल चंद्रपुरी नगरी में विभिन्न कार्यक्रम हुए। वर्धमान सभागार में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन , शास्त्र भेंट और पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य डॉ. अशोक बोली जयपुर, कमल बाबू जयपुर, प्रफुल्ल किशनगढ़ को मिला।
1 दिसंबर को होगी केवल ज्ञान की क्रिया
प्रातः अभिषेक पूजन आचार्य श्री के प्रवचन के बाद महामुनिराज की आहार चर्या, पंच आश्चर्य, विमान शुद्धि, मंदिर वेदी शुद्धि हवन के बाद दोपहर को केवल ज्ञान के संस्कार और भगवान को सूरी मंत्र दिए जाएंगे।समवशरण में आचार्य श्री की दिव्य देशना होगी। रात्रि में श्री जी और आचार्य श्री की आरती ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।













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