श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर के तत्वावधान में प्राकृत वाङ्मय एवं सिरिभूवलय के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयाम विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 20 एवं 21 दिसंबर 2025 (शनिवार-रविवार) को किया जा रहा है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। श्री दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर के तत्वावधान में प्राकृत वाङ्मय एवं सिरिभूवलय के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा के विविध आयाम विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 20 एवं 21 दिसंबर 2025 (शनिवार-रविवार) को किया जा रहा है। संगोष्ठी परम पूज्य अंतर्मुखी मुनिश्री 108 पूज्य सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद में सम्पन्न होगी
कार्यक्रम की प्रेरणा स्व. देवकुमारसिंह कासलीवाल, स्व. अतिरसिंह काला एवं स्व. प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल से प्राप्त है। आयोजन के निवेदक ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल हैं। ट्रस्टीगण में सुशील कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल, लोकेश कासलीवाल, प्र. अनिल जैन, इंजि. अनिल कुमार जैन (सिरिभूवलय), प्रो. संगीता मेहता (प्राकृत) तथा डॉ. अरविन्द कुमार जैन (एडमिनिस्ट्रेटर) शामिल हैं। संगोष्ठी में ऑकारी कस्तुरचंदजी पारमार्थिक संस्थाएं, दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन (इंदौर रीजन), दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम समाज, दिगम्बर जैन महावीर महिला मंडल, महावीर बहु मंडल उदासीन आश्रम एवं महावीर ट्रस्ट, इंदौर का सहयोग रहेगा।
ये रहेंगे कार्यक्रम
उद्घाटन सत्र 20 दिसंबर को प्रातः 9 से 11 बजे आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता प्रो. डॉ. जयकुमार उपाध्ये करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में इंदरसिंह परमार, प्रो. स्वप्निल कोठारी उपस्थित रहेंगे। आशीर्वचन परम पूज्य मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज देंगे। इसी अवसर पर पाण्डुलिपि प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं ग्रंथों का विमोचन भी किया जाएगा।
तकनीकी एवं विषयक सत्र होंगे आयोजित
संगोष्ठी के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विषयक सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रथम सत्र में प्राकृत विद्या के विविध आयाम, द्वितीय सत्र में प्राचीन पाण्डुलिपियों की ऐतिहासिकता तथा तृतीय सत्र में सत्यता की कसौटी पर सिरिभूवलय विषय पर विद्वानों के व्याख्यान होंगे। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए विद्वान, शोधकर्ता एवं विशेषज्ञ इन सत्रों में सहभागिता करेंगे।
21 दिसंबर को चतुर्थ सत्र प्राकृत वाक्य का संस्कृति संरक्षण और संवर्द्धन में योगदान विषय पर तथा पंचम सत्र अद्वितीय अलौकिक सिरिभूवलय विषय पर आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात पुरस्कार एवं सम्मान समारोह 02.30 से 04.30 बजे तक सम्पन्न होगा, जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे तथा शोधालेख प्रस्तुतकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। आयोजकों ने श्रमण संस्कृति संरक्षण के इस अनुसंधानात्मक कार्यक्रम में विद्वानों, शोधार्थियों एवं समाजजनों से सहभागिता का विनम्र आग्रह किया है।













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