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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : बताया भक्तामर के 25वें काव्य का महत्व     


 उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के पच्चीसवें काव्य का महत्व समझाते हुए बताया कि इस काव्य में मुनिवर ने कहा कि हे भगवन! केवलज्ञान होने से आप ही बुद्ध हो। सुख-शांति देने वाला होने से आप ही शंकर हो। सत्य पथ देने के कारण आप ही ब्रह्म हो। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट….


डबरा। आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा गणाचार्य 108 श्री विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से किया गया। इसके बाद मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। गुरुदेव ने भक्तामर स्तोत्र के पच्चीसवें काव्य का महत्व समझाते हुए बताया कि इस काव्य में मुनिवर ने कहा कि हे भगवन! केवलज्ञान होने से आप ही बुद्ध हो। सुख-शांति देने वाला होने से आप ही शंकर हो। सत्य पथ देने के कारण आप ही ब्रह्म हो। निर्मोह व परम अहिंसक होने से आप ही पुरुषोत्तम हो। आगम मुनियों के द्वारा जो कहा जाए, उसे आगम कहते हैं। उग्र तप किसे कहते हैं, इसकी व्याख्या करके गुरुदेव ने बताया कि कठिन साधना करना, कठिन उपवास करना, कठिन तपस्या में लीन रहना, लगातार उपवास करना, सर्दी में हिमालय पर जाकर तप करना ही उग्र तप कहलाता है।

स्वास्थ्य शिविर 6 को

मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंतसागर मुनिराज की प्रेरणा से जैन मिलन स्वतंत्र डबरा द्वारा 6 अगस्त को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक संस्कार वाटिका जवाहर गंज, डबरा में निशुल्क नेत्र परीक्षण एवं ऑपरेशन शिविर एवं दंत परीक्षण शिविर एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। जिसमें खून की जांच, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम, हीमोग्लोबिन 4 में से कोई एक निशुल्क जांच की जाएगी। रविवार को एसडीओपी विवेक शर्मा ने गुरुदेव को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। आरोग्यमय वर्षा योग समिति के महामंत्री अध्यक्ष एवं समिति द्वारा उनका सम्मान किया गया।

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