जैन धर्म के तीर्थंकरों में से एक भगवान नमिनाथ जी का केवल ज्ञान कल्याणक मगसिर एकादशी को है। दिगंबर जैन मंदिरों में सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना और विधानादि किए जा रहे हैं। भगवान नमिनाथ जी के केवलज्ञान कल्याणक के बारे में जैन धर्मग्रंथों के अनुसार प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरपुर नगर के राजा दत्त ने प्रभु की प्रथम पारणा का लाभ लिया था। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति….
इंदौर। जैन धर्म के तीर्थंकरों में से एक भगवान नमिनाथ जी का केवल ज्ञान कल्याणक मगसिर एकादशी को है। दिगंबर जैन मंदिरों में सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना और विधानादि किए जा रहे हैं। भगवान नमिनाथ जी के केवलज्ञान कल्याणक के बारे में जैन धर्मग्रंथों के अनुसार प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरपुर नगर के राजा दत्त ने प्रभु की प्रथम पारणा का लाभ लिया था। छद्मस्थ अवस्था के नौ वर्ष बीत जाने पर वे प्रभु एक दीक्षावन में पहुंचकर बेला के नियमपूर्वक वकुल वृक्ष के नीचे ध्यानस्थ हो गए। मगसिर शुक्ल एकादशी के दिन शाम को लोकालोकप्रकाशी केवलज्ञान को प्राप्त हो गए।
उनके समवशरण में सुप्रभार्य आदि 17 गणधर थे। 20 हजार मुनि, मंगिनी आदि 45 हजार आर्यिकाएं, 1 लाख श्रावक, 3 लाख श्राविकाएं थीं। विहार करते हुए एक मास की आयु अवशेष रहने पर भगवान नमिनाथ सम्मेदशिखर पर पहुंचे वहां 1 हजार मुनियों के साथ प्रतिमायोग में लीन हुए। भगवान नमिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक दिगंबर जैन मंदिरों में पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और भक्ति भावना के साथ मनाया जा रहा है।













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