जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक मगसिर शुक्ल एकादशी को मनाया जा रहा है। सोमवार को दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान की आराधना में जैन भक्त जुटे हैं। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित यह प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक मगसिर शुक्ल एकादशी को मनाया जा रहा है। सोमवार को दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान की आराधना में जैन भक्त जुटे हैं। भगवान मल्लिनाथ जी जैनधर्म के उन्नीसवें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म मिथिलापुरी के इक्ष्वाकुवंश में मगसिर शुक्ल पक्ष एकादशी को अश्विन नक्षत्र में हुआ था। इनकी माता का नाम रक्षिता देवी और पिता का नाम राजा कुंभराज था। इनके शरीर का वर्ण नीला था जबकि, इनका चिन्ह कलश था। इनके यक्ष का नाम कुबेर और यक्षिणी का नाम धरणप्रिया देवी था। जैन धर्मावलंबियों के अनुसार भगवान श्री मल्लिनाथ जी स्वामी के गणधरों की संख्या 28 थी, जिनमें अभीक्षक स्वामी इनके प्रथम गणधर थे। जैन धर्म ग्रंथ के अनुसार 19 वें तीर्थंकर भगवान श्री मल्लिनाथ जी ने मिथिलापुरी में मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को दीक्षा की प्राप्ति की थी और दीक्षा प्राप्ति के 2 दिन बाद खीर से प्रथम पारण किया था। दीक्षा प्राप्ति के पश्चात् एक दिन-रात तक कठोर तप करने के बाद भगवान श्री मल्लिनाथ जी को मिथिलापुरी में ही अशोक वृक्ष के नीचे कैवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी। भगवान श्री मल्लिनाथ जी ने हमेशा सत्य और अहिंसा का अनुसरण किया और अनुयायियों को भी इसी राह पर चलने का संदेश दिया।













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