जैन धर्म के तीर्थंकरों की श्रृंखला में भगवान अनंतनाथ जी का अलग ही स्थान और महत्व है। 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का गर्भ कल्याणक 7 अक्टूबर को तिथि के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण एकम को मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत आज पढ़िए उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित साभार प्रस्तुति….
इंदौर। जैन धर्म के तीर्थंकरों की श्रृंखला में भगवान अनंतनाथ जी का अलग ही स्थान और महत्व है। 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का गर्भ कल्याणक 7 अक्टूबर को तिथि के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण एकम को मनाया जाएगा। दिगंबर जैन मंदिरों में पूरी आस्था, श्रद्धा और भक्ति की अनूठी मिसाल इस अवसर पर नजर आएगी। नित्य पूजन के साथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा सहित विभिन्न प्रकार के अष्ट द्रव्यों से पूरित अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। जैन धर्म के पुराणोक्त वर्णन के आधार पर भगवान अनंतनाथ जी का गर्भ कल्याणक कार्तिक कृष्ण पक्ष की पहली तिथि (एकम) को मनाया जाता है। जब उनकी माता महारानी सुप्रिया ने कई शुभ स्वप्न देखे थे, जो एक महान आत्मा के आगमन का संकेत देते थे। यह दिन स्वर्ग लोक से प्रभु के पृथ्वी पर आगमन का प्रतीक है और इसे गर्भ धारण करने के शुभ अवसर के रूप में मनाया जाता है।
गर्भ कल्याणक का महत्व
शुभ संकेतों का प्रतीकरू यह दर्शाता है कि एक तीर्थंकर का जन्म होने वाला है, जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेंगे। शारीरिक और मानसिक शुद्धता के लिए ऐसी मान्यता है कि तीर्थंकर के गर्भ में आने से गर्भधारण करने वाली मां में विशेष शुद्धता और दिव्य ज्ञान आ जाता है। गर्भ कल्याणक जैन धर्म के पांच कल्याणकों में से एक है और यह तीर्थंकरों की जीवन यात्रा का प्रारंभिक और महत्वपूर्ण बिंदु है। जन्म और राज्याभिषेक भी महत्वपूर्ण हैं। गर्भ कल्याणक के साथ-साथ भगवान अनंतनाथ के जन्म कल्याणक (जन्म) और राज्याभिषेक कल्याणक भी मनाए जाते हैं। जैन आगमों में भगवान अनंतनाथ की जीवन गाथाओं का वर्णन है, जिसमें उनके गर्भ में आने के शुभ प्रसंगों का विस्तृत वर्णन है।













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