आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के अनुसार राम को जानना और रामायण को जानना अलग-अलग है। राम को जानना स्वयं की कायाकल्प करना है, तन-मन और आत्मा का परिवर्तन भिन्न होता है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के अनुसार राम को जानना और रामायण को जानना अलग-अलग है। राम को जानना स्वयं की कायाकल्प करना है, तन-मन और आत्मा का परिवर्तन भिन्न होता है। सधर्मी के लिए सहोदर भी उस उदर को छोड़ने तैयार हो जाता है, जिसमें धर्म की रक्षा ना होती हो। विभीषण के लिए राम बैरी (दुश्मन), रावण बंधु सहोदर फिर भी विभीषण आधी रात लंका छोड़कर राम के दल में पहुंचाता है, जहां पूरा राम दल मंत्रणा कर रहा था।
दुश्मन के मिलने आने पर आगबबूला हुए लक्ष्मण और दिन में आने की बात कहते हैं पर राम लक्ष्मण को शांति का आदेश देकर विभीषण को बुला लेते हैं क्योंकि विभीषण ने अभय के साथ मिलने का समय मांगा था। राम की यही शांति की धारा आज विश्व की जरूरत है। आज सारा संसार चारों ओर शत्रुता युद्ध और भय के वातावरण में है।
संसार के सारे देश चुप और संदेह में कब क्या हो जाए, कहां विस्फोट हो जाए। पर भारत ने युद्ध विराम के लिए बोलना शुरू कर दिया तो सारे देश भारत के विचारों का समर्थन करने लगे। यही राम का काम और नाम भारत में रामनवमी का यही तो महत्व है पर याद रखो, हम राम को मानते हैं और राम की बात को भी मानते हैं। तभी भारत महान बनेगा।













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