अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण में टीएमयू कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन तथा एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन साक्षी बने। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं। श्रीफल साथी ……..
जब धर्म और ध्वज एक साथ शिखर पर पहुँचते हैं, तब इतिहास बनता है।
इंदौर । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण का भव्य और दिव्य क्षण तेज रोशनी की तरह चमक उठा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र–ट्रस्ट के विशेष आमंत्रण पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने इस पावन अनुष्ठान में शामिल होकर धर्म ध्वजा फहराने का सौभाग्य पाया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी टीएमयू के जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन भी रहे, जिन्होंने अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई।
भगवा ध्वज फहरते ही गूंजे जयकारे
अभिजीत मुहूर्त में जैसे ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवा धर्म ध्वजा फहराने की प्रक्रिया शुरू की, पूरा परिसर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा। धर्म ध्वजा का भगवा रंग, सूर्य चिन्ह और कोविदार वृक्ष — रामराज्य की गौरवमयी कीर्ति का प्रतीक बताया गया।
देश की नामी हस्तियाँ बनीं साक्षी
समारोह में साधु-संतों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ सहित कई गणमान्य हस्तियाँ उपस्थित थीं। धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव एक ही मंच पर पूर्ण गौरव के साथ दिखाई दिए।
टीएमयू प्रतिनिधि मंडल हुआ भावविभोर
ध्वजारोहण के बाद समारोह में मौजूद अतिथियों, साधु-संतों और आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों ने श्रीरामलला के दर्शन किए और भव्य मंदिर परिसर में अभिभूत होते हुए स्मरणीय क्षणों को सेल्फी और फोटोग्राफी में कैद किया। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने भावुक होकर कहा — “धर्म ध्वज केवल वस्त्र नहीं, यह सनातन संस्कृति की आत्मा है।” जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने कहा — “यह क्षण हम सभी के लिए गौरवपूर्ण, अद्वितीय और अवर्णनीय है।”
इतिहास में दर्ज पहले भी विशेष योगदान
ध्यान देने योग्य है कि कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और जीवीसी श्री मनीष जैन 22 जनवरी 2024 को आयोजित श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हो चुके हैं। अयोध्या और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी श्रद्धा और सहभागिता पहले से ही ऐतिहासिक है।
ध्वज ऊँचा रहे धर्म का — यही सनातन की शक्ति और भारत की पहचान है।













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