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पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए आचार्य प्रज्ञासागर की पहल : 100 साल पुराने पेड़ के नीचे जैन भगवती दीक्षा लेंगे 3 साधक


 दिगंबर जैन आचार्य प्रज्ञासागर के सान्निध्य में कोटा में 2 मार्च का दीक्षा महोत्सव होगा। परंपरा से हटकर यह महोत्सव खुली जगह में ऐसे पेड़ के नीचे होगा जो 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। पेड़ और महोत्सव में आने वाले लोगों की तादाद देखते हुए कोटा जैन समाज के पदाधिकारी ऐसी जगह तलाश रहे थे। दीक्षा संस्कार अब थेगड़ा रोड स्थित मधुबन में करना तय हुआ। पढ़िए रेखा संजय जैन ,संपादक की यह विशेष रिपोर्ट…


कोटा। दिगंबर जैन आचार्य प्रज्ञासागर के सान्निध्य में कोटा में 2 मार्च का दीक्षा महोत्सव होगा। परंपरा से हटकर यह महोत्सव खुली जगह में ऐसे पेड़ के नीचे होगा जो 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। पेड़ और महोत्सव में आने वाले लोगों की तादाद देखते हुए कोटा जैन समाज के पदाधिकारी ऐसी जगह तलाश रहे थे। दीक्षा संस्कार अब थेगड़ा रोड स्थित मधुबन में करना तय हुआ। यहां कई पुराने पेड़ लगे हैं और चारों ओर अच्छी हरियाली है।

महावीर स्वामी ने ली थी पेड़ के नीचे दीक्षा

आचार्य प्रज्ञासागर ने बताया कि महावीर स्वामी ने स्वयं वृक्ष के नीचे दीक्षा ली थी। जितने तीर्थंकर हुए हैं, सभी जंगलों में और पेड़ों के नीचे

दीक्षित हुए। आचार्य शांतिसागर महाराज की दीक्षा भी पेड़ के नीचे हुई थी। जैन धर्म में दीक्षा लेना यानी सभी भौतिक सुख-सुविधाएं त्यागकर एक सन्यासी जीवन बिताने के लिए खुद को समर्पित कर देना है। संत बनने पर सांसारिक सुख- सुविधाएं, वैभव त्याग कर स्वयं को प्रकृति के लिए समर्पित कर देते हैं। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को यहां तीन साधकों को दीक्षा दी जाएगी। इनमें सूरत के देवेंद्र, उज्जैन की मीना और इंदौर की प्रेमलता जैन शामिल हैं। इसके लिए थेगड़ा रोड पर मधुवन गार्डन तय किया गया। यहां पांडाल नहीं बनेगा। आयोजन खुले में प्रकृति के सान्निध्य में होगा। इसमें देशभर से बड़ी संख्या में जैन समाजजन पहुंचेंगे, जो पौधे लगाने का संकल्प लेकर जाएंगे। थेगड़ा रोड पर मधुबन गार्डन, यहां कई पुराने पेड़ हैं। तीन साधकों की यहीं जैन भगवती दीक्षा होगी।

एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

सकल दिगंबर जैन समाज के कार्याध्यक्ष जे जैन ने बताया कि आचार्य सागर महाराज ने एक करोड़ पौध रोपण का लक्ष्य लेकर उज्जैन से इसकी शुरूआत की है। वह जहां भी विहार करते है, वहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते है और अनुयायियों से पेड़ लगवाते है। इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि धरती हरी-भरी रहेगी तो जीवन भी हरा-भरा रहेगा। वृक्ष है तो जीवन है। अभी तक सवा लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं। कोटा में भी बड़े स्तर पौध रोपण का कार्यक्रम होगा। कोटा के स्मृति वन के एक हिस्से में प्रज्ञा वाटिका बनेगी, जिसमें समाजजन के माध्यम से 11 हजार पौधे लगाए जाएंगे। प्रत्येक समाजजन के व्यक्ति को 11 पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

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